बीएचयू में 'पूरब के रंग' विषयक कार्यशाला में विशिष्ट गायन शैली का व्यावहारिक प्रशिक्षण

बीएचयू में 'पूरब के रंग' विषयक कार्यशाला में विशिष्ट गायन शैली का व्यावहारिक प्रशिक्षण

बीएचयू में 'पूरब के रंग' विषयक कार्यशाला में विशिष्ट गायन शैली का व्यावहारिक प्रशिक्षण

वाराणसी, 21 जुलाई। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय के गायन विभाग द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय कार्यशाला 'पूरब के रंग' के दूसरे दिन मंगलवार को विद्यार्थियों को पूरब अंग गायकी की विशिष्ट शैली का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला की प्रशिक्षक एवं बीएचयू महिला महाविद्यालय की आचार्या प्रो. ऋचा कुमार ने प्रतिभागियों को पूरब अंग गायकी की शैलीगत विशेषताओं, बोल-बनाव, भावाभिव्यक्ति तथा ठुमरी की प्रस्तुति के विभिन्न आयामों से परिचित कराया। उन्होंने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों को गायकी की बारीकियों का अभ्यास भी कराया।

संगीत एवं मंच कला संकाय की अधिष्ठाता एवं प्रमुख प्रो. संगीता पंडित तथा आयोजन सचिव डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य और डॉ. श्यामा कुमारी ने बताया कि कार्यशाला का शुभारंभ सोमवार से हुआ है। तीन दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में 'पूरब के रंग' विषय के अंतर्गत विशिष्ट गायन शैली की परंपरा, उसकी शैलीगत विशेषताओं और व्यावहारिक पक्षों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रो. ऋचा कुमार शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय संगीत की प्रतिष्ठित गायिका हैं और उनके मार्गदर्शन में प्रतिभागियों को पूरब अंग गायकी की परंपरा को व्यवहारिक रूप से सीखने का अवसर मिल रहा है।

कार्यशाला में बी.पी.ए., एम.पी.ए. एवं पीएच.डी. के विद्यार्थियों के साथ बीएचयू महिला महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

उल्लेखनीय है कि कार्यशाला के प्रथम दिन संकाय की विशिष्ट पूर्व छात्रा एवं मुंबई की सुप्रसिद्ध गायिका प्रियंका भट्टाचार्य भी उपस्थित रहीं। इस अवसर पर संकाय के आचार्यों ने उनका स्वागत एवं सम्मान किया।