हाईकाेर्ट : फर्जी रिमांड आदेश मामले में वकील समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश

हाईकाेर्ट : फर्जी रिमांड आदेश मामले में वकील समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश

हाईकाेर्ट : फर्जी रिमांड आदेश मामले में वकील समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश

हाईकाेर्ट : फर्जी रिमांड आदेश मामले में वकील समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश

प्रयागराज, 08 जुलाई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ललितपुर जिले से जुड़े एक मामले में रिमांड आदेश की जालसाजी सामने आने पर सख्त रुख अपनाते हुए बुधवार को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता समेत कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया है।

जितेंद्र सिंह निरंजन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य याचिका में याचिकाकर्ता ने खुद को अवैध रूप से हिरासत में रखे जाने का आरोप लगाते हुए रिहाई की मांग की थी। सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष दो अलग-अलग रिमांड आदेश दिनांक 03 मई 2026 प्रस्तुत हुए एक याचिका के साथ और दूसरा राज्य सरकार की काउंटर एफिडेविट के साथ। दोनों में अंतर पाए जाने पर पीठ ने मामले की तह तक जाने के लिए रिमांड मजिस्ट्रेट के न्यायालय से रिकॉर्ड तलब किया था।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ के आदेश पर ललितपुर के जिला न्यायाधीश ने अपर जिला एवं सत्र/विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) से विस्तृत जांच कराई। 29 जून 2026 की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि: असली रिमांड आदेश वही है जिस पर पीठासीन अधिकारी और अभियुक्त के हस्ताक्षर मौजूद हैं, जो काउंटर एफिडेविट के साथ पन्ना संख्या 18-19 पर दाखिल था।याचिका के साथ लगाया गया प्रपत्र केवल एक अहस्ताक्षरित प्रोफार्मा रिमांड शीट है, जिसे आदेश के रूप में पेश किया गया। यह प्रतिलिपि नकल विभाग से जारी प्रमाणित प्रति नहीं थी, बल्कि बिना उचित प्रक्रिया अपनाए प्राप्त की गई एक छायाप्रति थी, जिस पर बाद में ओथ कमिश्नर की मुहर लगाई गई।

जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अनुपम वर्मा ने जानबूझकर अनाधिकृत तरीके से यह प्रपत्र प्राप्त कर, इसे आदेश के रूप में हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया।

गंभीरता को देखते हुए खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अनुपम वर्मा, जितेंद्र सिंह निरंजन और जिला न्यायालय ललितपुर के कुछ कर्मचारी रिमांड आदेश की जालसाजी और उसकी फर्जी प्रमाणित प्रति जारी कराने में शामिल पाए गए हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि: जिला न्यायाधीश, ललितपुर, दो सप्ताह के भीतर सभी संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएं।

दोषी पाए गए न्यायालय कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू की जाए। पुलिस जांच हेतु याचिका का समस्त रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए। कोर्ट ने कहा जिला न्यायाधीश एक माह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट न्यायालय को सौंपें।

मामले की अगली सुनवाई अब 10 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।