NEET-UG 2026 में दिव्यांग अभ्यर्थी को बड़ी राहत, अधिकृत प्रमाणपत्र के समानांतर मेडिकल बोर्ड नहीं कर सकता नया आकलन
55% स्थायी दिव्यांगता प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थी की दिव्यांगता मेडिकल बोर्ड ने 20% अस्थायी बताई थी। हाईकोर्ट ने कहा- मूल प्रमाणपत्र को चुनौती दिए बिना उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
प्रयागराज, 12 सितंबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नीट -यूजी 2026 में दिव्यांग आरक्षण के मामले में 55 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थी को राहत दी है। न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने 10 सितंबर को कहा कि अधिकृत प्राधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के समानांतर मेडिकल बोर्ड नया प्रमाणपत्र जारी कर उसकी वैधता तय नहीं कर सकता।
अभ्यर्थी के पास 30 जून 2025 को जारी 55 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता का प्रमाणपत्र था। नीट की दिव्यांग श्रेणी के लिए मेडिकल बोर्ड ने उसकी दिव्यांगता 20 प्रतिशत और अस्थायी बताई। अपील के बाद भी यही आकलन कायम रहा।
न्यायालय ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 में प्रमाणपत्र जारी करने और उसके खिलाफ अपील की स्पष्ट व्यवस्था है। जब मूल प्रमाणपत्र को चुनौती नहीं दी गई है तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सोम्या पाल बनाम भारत संघ मामले में दिए अपने पूर्व निर्णय के आधार पर अभ्यर्थी को दिव्यांग श्रेणी में सीट का दावा करने की अनुमति दे दी। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया की जांच की जरूरत है।