नॉलेज इकोनॉमी की महाशक्ति बनेगा भारत, राष्ट्रनिष्ठ व संस्कारित छात्रशक्ति गढ़ेगी अभाविप
नॉलेज इकोनॉमी की महाशक्ति बनेगा भारत, राष्ट्रनिष्ठ व संस्कारित छात्रशक्ति गढ़ेगी अभाविप
लखनऊ, 23 जुलाई । 21वीं सदी की 'नॉलेज इकोनॉमी' में भारत को वैश्विक नेतृत्व दिलाने और राष्ट्रनिष्ठ, चरित्रवान व नवाचार-सक्षम छात्रशक्ति तैयार करने के लक्ष्य के साथ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने भविष्य का अपना विजन सामने रखा है। संगठन का कहना है कि ज्ञान, अनुसंधान, कौशल, नवाचार और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के समन्वय से ही भारत विश्व की अग्रणी ज्ञान महाशक्ति बन सकता है। इसी उद्देश्य से अभाविप शिक्षा सुधार, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण को एकसूत्र में जोड़ते हुए देशभर के परिसरों में जागरूक, सक्षम और संस्कारित छात्रशक्ति तैयार करने का अभियान तेज करेगी। पिछले एक दशक तक छात्रहित के मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर निर्णायक भूमिका निभाने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने अब भारत को विश्वस्तरीय शिक्षा व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री (पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र) घनश्याम शाही ने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में कहा कि अभाविप का मूल उद्देश्य केवल विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान कराना नहीं, बल्कि राष्ट्र जीवन के प्रत्येक क्षेत्र के लिए चरित्रवान, सक्षम, सामाजिक रूप से उत्तरदायी और नेतृत्व क्षमता से युक्त युवाओं का निर्माण करना है। परिषद का विश्वास है कि विश्वगुरु भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश की शिक्षा व्यवस्था विश्वस्तरीय, पारदर्शी, शोध आधारित, तकनीक-सक्षम और विद्यार्थी-केंद्रित बनेगी।
उन्होंने कहा कि इसी लक्ष्य को लेकर परिषद आने वाले समय में पारदर्शी भर्ती एवं प्रवेश परीक्षा प्रणाली, एनटीए में व्यापक सुधार, पेपर लीक पर प्रभावी नियंत्रण, समयबद्ध शैक्षणिक कैलेंडर, फीस रेगुलेशन कानून, शिक्षा पर जीडीपी का छह प्रतिशत व्यय, आधुनिक छात्रावास, डिजिटल एवं शोध सुविधाओं का विस्तार, स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा, सुरक्षित परिसर तथा गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती शिक्षा को लेकर देशव्यापी अभियान चलाएगी।
क्षेत्रीय संगठन मंत्री ने कहा कि शिक्षा सुधार का यह विजन पिछले एक दशक में देशभर में छात्रहित के लिए चले आंदोलनों, जनजागरण अभियानों और लोकतांत्रिक संघर्षों के अनुभवों से विकसित हुआ है। केरल में मेडिकल कॉलेज फीस वृद्धि के विरोध से लेकर केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्रावास और रिक्त शिक्षकों के पद भरने की मांग, छात्रवृत्ति, छात्राओं की सुरक्षा, शिक्षा के व्यवसायीकरण के विरोध, मेडिकल सीटों में वृद्धि, शोधार्थियों के अधिकार, कोविड काल में विद्यार्थियों के हित, सीयूईटी और एनटीए सुधार, नीट पेपर लीक के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन, तेलंगाना में छात्रवृत्ति एवं फीस प्रतिपूर्ति, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि के विरोध और नीट-2026 की अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर अभाविप ने लगातार राष्ट्रीय स्तर पर विद्यार्थियों की आवाज बुलंद की है।
उन्होंने कहा कि संगठन की पहचान केवल आंदोलनों से नहीं, बल्कि रचनात्मक राष्ट्र निर्माण से है। परिषद का प्रयास है कि भारत का प्रत्येक शिक्षण संस्थान उत्कृष्टता, नवाचार, अनुसंधान और नैतिक मूल्यों का केंद्र बने, ताकि भारतीय विद्यार्थी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी भूमिका निभा सकें।
'विद्यार्थी पहले, शिक्षा सर्वोपरि और राष्ट्र सर्वोच्च' का संकल्प
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी पहले, शिक्षा सर्वोपरि और राष्ट्र सर्वोच्च अभाविप की कार्यसंस्कृति है। आने वाले वर्षों में परिषद का प्रयास भारत को केवल शिक्षित राष्ट्र नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और सांस्कृतिक मूल्यों के बल पर विश्व की अग्रणी 'नॉलेज इकोनॉमी' और 'विश्वगुरु' के रूप में स्थापित करने के लिए राष्ट्रनिष्ठ, संस्कारित और समाजोन्मुख छात्रशक्ति तैयार करना होगा। इसी लक्ष्य के साथ अभाविप देशभर के परिसरों में शिक्षा सुधार और राष्ट्र निर्माण के अभियान को नई गति देगी।