श्रावण में बाबा सिद्धनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की पूरी होती मनोकामनाएं
श्रावण में बाबा सिद्धनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की पूरी होती मनोकामनाएं
हरदोई से करीब 21 किमी. की दूरी पर हरदोई-शाहजहांपुर मार्ग पर मियांपुर ग्रामसभा के राजस्व ग्राम हुसेनापुर धौकल में स्थापित इस सिद्धनाथ बाबा मंदिर पर आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।यह मंदिर हरदोई-शाहजहांपुर मुख्य मार्ग एवं मियांपुर गांव से करीब डेढ़ किमी. दूरी पर स्थित है।तथा रेल मार्ग के टोडरपुर स्टेशन से करीब एक किमी.की दूरी पर है।सावन में तो यहां सुदूर क्षेत्रों से भक्त आते ही हैं।वैसे भी सामान्य दिनों में मुंडन,जन्मदिन, रुद्राभिषेक आदि के लिए भी महिलाओं ,पुरुषों ,बच्चों का यहां आवागमन होता रहता है।
शिव सत्संग मंडल आश्रम,हुसेनापुर धौकल(टोडरपुर) स्थित सिद्धनाथ बाबा मंदिर के विषय में मण्डल के राष्ट्रीय महामंत्री त्रिपुरेश पाण्डेय ने बताया कि यह शिवालय वर्ष 1993 में तत्कालीन ग्राम प्रधान हरिकरण, तहसीलदार मनमोहन सक्सेना,उपजिलाधिकारी रामकृपाल श्रीवास्तव एवं संत श्रीपाल के संयुक्त प्रयास से स्थापित किया गया। तब यहां की भूमि ऊसर बंजर थी।लेकिन जब से शिव भक्तों,कांवरियों ने यहाँ आना जाना शुरू किया तथा भगवान शंकर की उपासना शुरू की।पूरे क्षेत्र का वातावरण ही आध्यात्मिक हो गया।सब तरफ हरियाली ही हरियाली हो गई।तब यहां महात्मा बोदिलदास एक झोपड़ी में रहते थे।शनैः शनैः भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने लगीं।जिससे विशेषकर हर सोमवार को सत्संगीजनों ,शिव उपासकों की संख्या बढ़ी।और फिर हर माह की पहली तारीख को भक्तों व संतों का समागम होने लगा।
मंदिर की निगरानी व व्यवस्था की देखभाल करने वाले शिव सत्संग मण्डल के मंडलाध्यक्ष आचार्य अशोक बताते हैं कि आश्रम व मंदिर परिसर में संतों भक्तों के लिए भंडारा व्यवस्था एवं स्वल्पाहार की व्यवस्था प्रसाद के साथ रहती है। उनका कहना है कि शिव की उपासना सभी वर्गों व संप्रदायों के लिए शुभ और कल्याणकारी है। सिद्ध नाथ बाबा मंदिर के पुजारी महात्मा शांतानंद कहते हैं कि शंकर भगवान की पूजा अर्चना तो वर्षभर होती है।परंतु श्रावण माह में भक्तों की आस्था, श्रद्धा, विश्वास देखते ही बनता है।भक्तों के विश्राम और सत्संग के लिए अलग मंडला/सत्संग स्थल एवं साधना स्थल बना हुआ है।प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त से ही मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाता है।ताकि किसी भक्त को कोई असुविधा न हो।शिव शिव बोलो, निर्भय डोलो,सत्यम शिवम् सुंदरम एवं जय शिव का उद्घोष वातावरण भक्तिमय बनाता है।