राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमारी शिक्षा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव : डॉ किरणलता डंगवाल
राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमारी शिक्षा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव : डॉ किरणलता डंगवाल
प्रयागराज, 27 मई । लगभग 34 सालों के लंबे इंतजार के बाद आई यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमारी शिक्षा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव है। जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रों का सर्वांगीण विकास करना है। अब तक हमारी व्यवस्था ’क्या सोचना है’ पर जोर देती थी, लेकिन यह नई नीति ’कैसे सोचना है’ पर ध्यान केंद्रित करती है, जिससे छात्रों को रटने की पुरानी संस्कृति से मुक्ति मिलेगी।
यह बातें बतौर मुख्य वक्ता लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ0 किरणलता डंगवाल ने बुधवार को सिविल लाइन्स स्थित ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित ’नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग’ में नवचयनित आचार्यों को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने ’नई शिक्षा निति 2020’ पर बेहद प्रेरक एवं विचारोत्तेजक मार्गदर्शन प्रदान करते हुए कहा कि आज मुझे एक ऐसे विषय पर बोलने का अवसर मिला है जो हमारे देश के भविष्य की नई इबारत लिख रहा है, और वह है राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020।
उन्होंने कहा कि इस नीति ने पुराने 10$2 ढांचे को बदलकर एक नया 5$3$3$4 का पैटर्न दिया है, जिसमें खेल-खेल में सीखने और बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने पर ध्यान है। सबसे अच्छी बात यह है कि अब आर्ट्स, कॉमर्स या साइंस की कड़क बंदिशें खत्म हो गई हैं। अब एक छात्र फिजिक्स के साथ इतिहास जैसे अपनी पसंद के विषयों को भी चुन सकता है। इसके साथ ही, कक्षा 6 से ही कोडिंग और वोकेशनल कोर्स के जरिए कौशल विकास पर जोर दिया जा रहा है ताकि युवाओं को रोजगार के असली हुनर मिल सकें, और प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा को प्राथमिकता देकर बच्चों के समझने की क्षमता को और गहरा किया गया है। उन्होंने कहा कि एनईपी 2020 सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण का संकल्प है, जो हमें रटने वाले रोबोट नहीं बल्कि सोचने और नए आविष्कार करने वाले इंसान बनाती है। यदि इसे सही ढंग से लागू किया गया, तो हमारा देश निश्चित ही फिर से ’विश्व गुरु’ कहलाएगा।
प्रशिक्षण के अगलेे सत्र में नवचयनित आचार्य बंधु व भगिनियों को रेनू श्रीवास्तव का पाथेय प्राप्त हुआ। उल्लेखनीय है कि पन्द्रह दिनों तक चलने वाले इस सघन और आवासीय प्रशिक्षण वर्ग में नवचयनित आचार्यों को शिक्षा जगत के विभिन्न शीर्ष विद्वानों और विषय विशेषज्ञों द्वारा निरंतर प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण को सर्वांगीण और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिदिन चार विशेष सत्रों की अनूठी रूपरेखा तैयार की गई है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं।
’’वैचारिक सत्र’’ शिक्षा के मूल उद्देश्यों, राष्ट्रनिष्ठा और विद्या भारती की वैचारिक पृष्ठभूमि पर गंभीर विमर्श।’’शैक्षिक सत्र’’ आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, तकनीकी कौशल और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा।’’क्रियात्मक सत्र’’ व्यावहारिक शिक्षण कौशल, कक्षा-कक्ष अनुशासन और सुदृढ़ विद्यालय प्रबंधन का सजीव प्रशिक्षण।’’चर्चात्मक सत्र’’ परस्पर संवाद और समूह चर्चा के माध्यम से शिक्षण के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और उनके रचनात्मक समाधानों का अन्वेषण।
विद्यालय के मीडिया प्रभारी सरोज दूबे ने बताया कि शुरुआत में प्रदेश निरीक्षक शेषधर द्विवेदी ने मुख्य वक्ता डॉ. किरणलता डंगवाल सहित सभी नवागत अतिथियों का स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्रम तथा श्रीफल भेंट कर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस वृहद प्रशिक्षण वर्ग का मुख्य उद्देश्य आचार्यों को कुशल, संस्कारी, अध्यात्मनिष्ठ और आधुनिक युग की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना है ताकि वे आने वाली पीढ़ी को गढ़कर राष्ट्र निर्माण में अपनी महती भूमिका निभा सकें।