हाईकोर्ट ने उप्र सरकार के एसीएस होम से मांगा जवाब

-केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे सम्मानसूचक शब्द क्यों नहीं

हाईकोर्ट ने उप्र सरकार के एसीएस होम से मांगा जवाब

प्रयागराज, 03 अप्रैल। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक एफआईआर में केंद्रीय मंत्री के नाम के साथ सम्मानसूचक शब्द न लगाए जाने पर सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।

जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने राज्य के अपर मुख्य सचिव (गृह) को हलफनामा दाखिल कर इस चूक का कारण बताने का निर्देश दिया। अदालत ने पाया कि एफआईआर में एक स्थान पर केंद्रीय मंत्री का नाम बिना किसी सम्मानसूचक शब्द जैसे ‘माननीय’ या ‘श्री’ के सीधे लिखा गया।

इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि भले ही शिकायतकर्ता ने मंत्री का उल्लेख इस तरह किया हो लेकिन पुलिस का दायित्व था कि एफआईआर दर्ज करते समय प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उचित सम्मानसूचक शब्द जोड़े जाएं।

अदालत ने यह निर्देश एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें आपराधिक धमकी और आपराधिक विश्वासघात से जुड़े आरोपों को चुनौती दी गई और उसी एफआईआर में सम्बंधित केंद्रीय मंत्री का नाम भी शामिल है। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आदेश दिया कि वह यह निर्देश 48 घंटे के भीतर सम्बंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं। मामले की अगली सुनवाई छह अप्रैल को होगी। हाईकोर्ट ने यह आदेश हर्षित शर्मा व दो अन्य की तरफ से दाखिल याचिका पर दिया है। मामला मथुरा का है।