मुख्यमंत्री याेगी की पहल पर 48 वर्ष बाद संभल के दंगा पीड़ित परिवार काे मिली जमीन, प्रभारी मंत्री ने किया भूमि पूजन
-संभल में 1978 के सांप्रदायिक दंगों में दंगाइयों ने कर दी थी रामशरण रस्तोगी की हत्या-मुख्यमंत्री याेगी ने पीड़ित परिवार से मिल कर न्याय दिलाने का किया था वादा
संभल, 04 जून । जनपद संभल में 1978 में हुए सांप्रदायिक दंगों में दंगाइयों के हाथों जान गंवाने वाले रामशरण रस्तोगी के परिजनों से गुरुवार काे उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री जेपीएस राठाैर संभल पहुंचे और परिजनाें काे जमीन का पट्टा साैंपा। परिजनाें ने सरकार की ओर से पट्टा मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया है।
दरअसल, सन् 1978 में संभल में सांप्रदायिक दंगों में रामशरण रस्तोगी की हत्या कर उसके शव को क्षत-विक्षत कर कुएं में फेंक दिया था। पिछले वर्ष उनका पौत्र कपिल रस्तोगी अपनी माता के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर न्याय मांगा था। इसके बाद मुख्यमंत्री यागी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवार के पुनर्वास के लिए भूमि उपलब्ध करने का आश्वासन दिया था। इससे पहले विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी ने संभल में 184 हिंदुओं की निर्मम हत्या काे लेकर पूरा घटनाक्रम बताया था। इसके बाद अब प्रशासन ने मृतक रामशरण रस्तोगी की पुत्रवधू रुक्मन रस्तोगी को गुरुवार काे ग्राम शेरखां सराय बाहर चुंगी में 100 वर्ग मीटर भूमि का आवासीय पट्टा आवंटित कर दिया है। जिसका प्रमाण पत्र प्रदेश सरकार में सहकारिता राज्यमंत्री एवं जनपद के प्रभारी मंत्री जेपीएस राठौर ने मंडलायुक्त आनंजेन्य कुमार, जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई की उपस्थिति में रस्तोगी के परिजनों को साैंपा। साथ ही भूमि पर कब्जा हस्तांतरित करके नींव की प्रथम ईंट भी प्रभारी मंत्री के रखी गई।
इस मौके पर संभल के प्रभारी मंत्री राठौर ने कहा कि ऐसा है कि हमारे लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि 1978 के दंगों में 100 से अधिक लोगों की जानें गई। उनके घरों को जलाया गया। इस धरती को अपवित्र करने का काम यहां हुआ। यहां लोगों पर जुल्म ढाये गए थे। लोग यहां से घर छोड़ कर चले गए थे। उनका फिर से आशियाना बनाने के लिए एक एक साै वर्ग मीटर का पट्टा देने का काम मुख्यमंत्री के आदेश पर दिया जा रहा है। अन्य ऐसे लोगों की पुनर्वापसी कराने के लिए सरकार प्रयासरत है।
वहीं मृतक रामशरण रस्तोगी के पौत्र कपिल रस्तोगी ने बताया कि 29 मार्च 1978 को मेरे दादाजी रामशरण रस्तोगी अपनी दुकान पर बैठे थे तभी दंगाइयों की भीड़ ने दुकान में लूटपाट की और विरोध करने पर दंगाइयों ने मेरे दादा पर चाकू के 109 वार कर पूरे शरीर काे गाेदकर हत्या कर दी। इतना ही नहीं हत्या करने के बाद दुकान पर रखे तराजू ओर बाट में बांध कर उन्हें कुएँ में फेंक दिया। कपिल ने बताया कि वर्ष 2005 में दंगाइयों की धमकी मुकदमे को लेकर मिली थी, जिसकी वजह से हमने यहां से पलायन किया और अब हम इस समय दिल्ली में रहते हैं।
पौत्र कपिल रस्तोगी ने बताया कि हमने मुख्यमंत्री के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की थी और उन्हें एक पत्र साैंप कर मदद मांगी थी। इसके बाद योगी ने जिला प्रशासन को कार्यवाही के लिए कहा और अब हमें संभल में बसने के लिए शेरखां सराय में 100 वर्ग मीटर जमीन का पट्टा मिल रहा है। पट्टा देकर यहां घर बसाने से हमें यह लग रहा है कि हमारे साथ कहीं न कहीं अब जाकर न्याय हुआ है। 48 साल की लम्बे संघर्ष के बाद योगी सरकार और जिला प्रशासन ने हमारी सुध ली है।
वहीं मृतक की पुत्रवधु रुकमन रस्तोगी ने कहा कि 1978 के दंगों के बाद हमें धमकी मिलने लगी। जिसके चलते हम पलायन को मजबूर हुए लेकिन अब हमें पट्टा मिल गया है और हम घर बना कर बसना चाहते हैं। मुख्यमंत्री योगी और संभल प्रशासन का बहुत बहुत धन्यवाद।