लम्बे समय तक आउटसोर्सिंग से भर्ती टालना अनुचित: हाइकोर्ट
लम्बे समय तक आउटसोर्सिंग से भर्ती टालना अनुचित: हाइकोर्ट
प्रयागराज, 23 मार्च । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सरकारी संस्थानों द्वारा नियमित नियुक्तियों को दरकिनार कर लम्बे समय तक आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों से काम लेने की प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने इसे शोषण और अन्याय को बढ़ावा देने वाला बताया है।
जस्टिस विक्रम डी चौहान ने बरेली नगर निगम को निर्देश दिया कि 13 वर्षों से आउटसोर्स के आधार पर काम कर रहे कम्प्यूटर ऑपरेटर के नियमितीकरण पर पुनर्विचार किया जाए। कोर्ट ने कहा कि जब किसी कर्मचारी से लम्बे समय तक लगातार काम लिया जाता है और उसका कार्य विभाग के लिए आवश्यक और स्थायी प्रकृति का है तो उसे आउटसोर्सिंग के जरिए रखना शोषणकारी व्यवस्था का संकेत है। अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह की व्यवस्था से न केवल कर्मचारियों के साथ अन्याय होता है, बल्कि सरकार नियमित भर्ती प्रक्रिया को भी नजरअंदाज करती है।
मामले में याचिकाकर्ता कफी अहमद खान 2011 से नगर निगम में कार्यरत था। पहले उसे दैनिक वेतन पर रखा गया, बाद में उसकी सेवाएं एक ठेकेदार के माध्यम से जारी रखी गईं। 13 साल से अधिक समय तक लगातार काम करने के बावजूद उसके नियमितीकरण का आवेदन खारिज कर दिया गया।
हाइकोर्ट ने कहा कि राज्य एक आदर्श नियोक्ता होता है और उसका कर्तव्य है कि वह कर्मचारियों के साथ निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करे, न कि उनका शोषण करे। अदालत ने यह भी कहा कि जब किसी विभाग में काम स्थायी रूप से बढ़ता है तो सरकार को स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ानी चाहिए, न कि आउटसोर्सिंग के जरिए काम चलाना चाहिए।
कोर्ट ने चिंता जताई कि लम्बे समय तक अस्थायी रूप से काम करने वाले कर्मचारी उम्र सीमा पार कर जाते हैं। बाद में नियमित भर्ती में भाग लेने का अवसर भी खो देते हैं। इन सभी पहलुओं को देखते हुए हाइकोर्ट ने नगर आयुक्त का आदेश रद्द किया और संबंधित प्राधिकरण को चार महीने के भीतर याचिकाकर्ता के नियमितीकरण पर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया।