उप्र सरकार ने पहली बार विधानसभा में प्रस्तुत की आर्थिक समीक्षा

उप्र सरकार ने पहली बार विधानसभा में प्रस्तुत की आर्थिक समीक्षा

उप्र सरकार ने पहली बार विधानसभा में प्रस्तुत की आर्थिक समीक्षा

 उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को विधानसभा में उत्तर प्रदेश की आर्थिक समीक्षा 2025-26 प्रस्तुत की। उन्होंने उत्तर प्रदेश की स्थिति के बारे में विस्तृत रिपोर्ट पेश कर सदन को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में बजट का आकार दोगुना हो गया।

संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि आज हम सब एक ऐतिहासिक पल के साक्षी हैं, जब उत्तर प्रदेश भारत सरकार के अनुवर्त अपनी आर्थिक समीक्षा पहली बार सदन के समक्ष प्रस्तुत कर रहा है। प्रदेश की आर्थिक समीक्षा केवल आँकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि हमारे राज्य की प्रगति, जनता की आकांक्षाओं और भविष्य की संभावनाओं का जीवंत दस्तावेज है।

उत्तर प्रदेश, भारत की सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक, आज नई आर्थिक दृष्टि और ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था 25 करोड़ से अधिक नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है, जो इसे कृषि उत्पादन, औद्योगिक विकास और तकनीकी नवाचार का प्रमुख केंद्र बना रही है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। जिसका आकार वर्ष 2016-17 में 13.30 लाख करोड़ से दो गुना से अधिक बढ़कर वर्ष 2024-25 में 30.25 लाख करोड़ (सवा तीस लाख करोड़) के आँकड़े को पार किया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 36 लाख करोड़ के आंकड़े तक पहुँचने की ओर अग्रसर है। एक समय जिस प्रदेश से निवेशक कतराते थे, वहीं अब लगभग 50 लाख करोड़ से अधिक के औद्योगिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश को पारदर्शी नीतियां, समयबद्ध प्रोत्साहन और ‘ट्रिपल एस.’ (सेफ्टी, स्टेबिलिटी, स्पीड) की गारंटी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।



उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान वर्ष 2016-17 के 8.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 9.1 प्रतिशत तक पहुँच गया है।

प्रतिव्यक्ति आय- (50 वर्ष बाद उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय में गिरावट के रुख को परिवर्तित कर ऐतिहासिक बदलाव आया है)

आजादी के समय उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय देश के औसत के बराबर थी, लेकिन लगातार गिरते हुए यह 2014-15 में राष्ट्रीय औसत का केवल 50.2% रह गई। वर्ष 2024-25 में गिरावट के रुख को परिवर्तित कर ऐतिहासिक बदलाव करते हुए प्रतिव्यक्ति अनुपात बढ़कर 53.5% हो गया है। इसके बढ़ने की प्रवृत्ति को लेकर हम आश्वस्त हैं।

प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय (प्रति व्यक्ति निबल उत्पाद) वर्ष 2016-17 में 54 हजार 564 थी, जो आठ वर्षों में दोगुनी होकर वर्ष 2024-25 में रु. एक लाख 09 हजार 844 तक पहुँच गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु प्रति व्यक्ति आय एक लाख 20 हजार होने का अनुमान है।

प्रदेश का प्रति व्यक्ति आय सकल घरेलू उत्पाद (जी.एस.डी.पी. पर कैपिटा) के आधार पर वर्ष 2016-17 में 61 हजार 142 से बढ़कर वर्ष 2024-25 में एक लाख 26 हजार 304 हो गयी है।

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था (जी.एस.डी.पी.) में वर्ष 2024-25 के अनुसार कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र का योगदान 25.8%, औद्योगिक क्षेत्र का 27.2% तथा सेवा क्षेत्र का 47 प्रतिशत है।

प्रदेश का कुल बजट वर्ष 2016-17 के बजट 3.47 लाख करोड़ से (नौ वर्षों) की अवधि में 4.86 लाख करोड़ की वृद्धि दर्ज करते हुए वर्ष 2025-26 हेतु 8.33 लाख करोड़ अनुमानित किया गया है। इसी के समकक्ष पूर्ववर्ती अवधि वर्ष 2008-09 से वर्ष 2016-17 (आठ वर्षों) में यह वृद्धि मात्र 2.34 लाख करोड़ की ही थी। इसी के साथ सुरेश खन्ना ने विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत किया। इसके साथ उप्र विधानसभा मंगलवार की सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित हो गयी।