व्यापारी को झूठे केस में फंसाने पर पांच पुलिसकर्मी पर एफआईआर
व्यापारी को झूठे केस में फंसाने पर पांच पुलिसकर्मी पर एफआईआर
लखनऊ , 5 दिसंबर । लखनऊ में वर्ष 2020 के एक कथित ‘गुडवर्क’ मामले में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद बंथरा थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर सहित पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। एंटी करप्शन इकाई की तीन साल की जांच के बाद यह कार्रवाई की गई। दर्ज रिपोर्ट के अनुसार इंस्पेक्टर प्रह्लाद सिंह, सीनियर सब-इंस्पेक्टर दिनेश कुमार, सब-इंस्पेक्टर संतोष कुमार, राजेश कुमार और आलोक श्रीवास्तव पर आरोप है कि उन्होंने एक सरिया व्यापारी को चोरी और जालसाजी के झूठे मुकदमे में फंसाया था। एफआईआर एंटी करप्शन के निरीक्षक नूरुल हुदा खान की ओर से पीजीआई थाने में दर्ज कराई गई है। फिलहाल आरोपी पुलिसकर्मी लखनऊ पुलिस लाइन और बहराइच में तैनात बताए गए हैं।
मामला 31 दिसंबर 2020 का है, जब दरोगा संतोष कुमार ने जनाबगंज क्षेत्र में बाबा ढाबा के पास एक हाते में चोरी की सरिया के सौदे की सूचना मिलने का दावा किया था। इसके आधार पर पुलिस टीम ने सरिया व्यापारी विकास गुप्ता और उसके डाला चालक दर्शन सिंह को हिरासत में लिया और छह अन्य लोगों को फरार दिखाते हुए मुकदमा दर्ज कर दिया। पुलिस की ओर से यह भी बताया गया कि हाफ-डाला में चोरी की सरिया बरामद की गई और आरोपियों ने स्वीकार किया है कि यह माल फरार साथियों से खरीदा गया है। हालांकि व्यापारी की जेब से विशाल आयरन स्टोर की बाकायदा वैध रसीद मिली थी, जिसे पुलिस ने अनदेखा करते हुए कहानी गढ़ दी कि व्यापारी चोरी की सरिया सस्ते में खरीदकर अपनी दुकान पर महंगे दामों में बेचता है।
जांच में खुलासा हुआ है कि पुलिस ने न केवल झूठे साक्ष्य तैयार किए, बल्कि कोर्ट में भी फर्जी दस्तावेज पेश किए। मामले में बंथरा के पहाड़पुर गांव के निवासी लालता सिंह, उनके बेटे कौशलेंद्र, सतीश और शेखूपुर के कल्लू गुप्ता को भी आरोपी बनाया गया था। आरोप है कि इन लोगों के मनगढ़ंत बयान दर्ज कर उन्हें केस में शामिल किया गया। 2022 में लालता सिंह और कल्लू गुप्ता को जेल भी भेजा गया, जहां वे करीब 20 दिन तक बंद रहे। जमानत पर बाहर आने के बाद पीड़ित पक्ष ने मामले की शिकायतें शुरू कीं, जिसके बाद एंटी करप्शन इकाई ने जांच में पाया कि पूरा मामला पुलिस की बनाई हुई कहानी थी और किसी भी स्तर पर चोरी या जालसाजी का प्रमाण नहीं मिला।
पीड़ित लालता सिंह का कहना है कि इस झूठे केस ने उनके परिवार की सामाजिक छवि और आजीविका दोनों को नुकसान पहुंचाया है। उनका कहना है कि जब तक संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और सजा नहीं होती, तब तक न्याय अधूरा रहेगा।