अहंकार विनाश का कारण, सत्य और मर्यादा ही जीवन का आधार : बाल योगी संजय महाराज

अहंकार विनाश का कारण, सत्य और मर्यादा ही जीवन का आधार : बाल योगी संजय महाराज

अहंकार विनाश का कारण, सत्य और मर्यादा ही जीवन का आधार : बाल योगी संजय महाराज

मीरजापुर, 14 जून । दीवानपुर स्थित नर्मदेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित वाल्मीकि रामायण कथा के समापन दिवस पर अंतर्राष्ट्रीय संत बाल योगी संजय महाराज ने रामायण के अंतिम प्रसंगों का वर्णन करते हुए सत्य, मर्यादा और विनम्रता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि रावण जैसा महाशक्तिशाली और समृद्ध कुल भी अहंकार के कारण नष्ट हो गया। आज भी यदि व्यक्ति, समाज या व्यवस्था सत्य के मार्ग से भटकती है तो उसका पतन निश्चित है।

व्यासपीठ से कथा का रसपान कराते हुए बाल योगी संजय महाराज ने कहा कि महर्षियों की तपोभूमि और लोककल्याण के आदर्शों से प्रेरित रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली मार्गदर्शिका है। इसके प्रसंग वर्तमान समय में परिवार, समाज और शासन व्यवस्था के लिए भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने त्रेतायुग में थे।

उन्होंने रावण के जीवन के उन पक्षों पर विशेष प्रकाश डाला, जहां से उसके भीतर अधर्म और अहंकार का उदय हुआ। महाराज ने कहा कि रावण ने कठोर तपस्या के बल पर अपार शक्तियां प्राप्त की थीं, लेकिन बढ़ते अहंकार ने उसे न्याय और धर्म के मार्ग से भटका दिया। परिणामस्वरूप वह अपने परिवार, समाज और कुल के हितों की रक्षा नहीं कर सका और अंततः उसका सर्वनाश हो गया।

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की वास्तविक महानता उसके पद, शक्ति या वैभव में नहीं, बल्कि उसके विनम्र आचरण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व में निहित होती है। जो व्यक्ति अहंकार में अपने कर्तव्यों को भूल जाता है, उसका अंत भी रावण की तरह ही होता है।

कथा के समापन अवसर पर मुख्य यजमान जयंती प्रसाद पांडेय एवं गया प्रसाद पांडेय ने विधि-विधान से आरती-पूजन किया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और धर्मोपदेश का लाभ प्राप्त किया।

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