सात समंदर पार छठ महापर्व: एडिनबर्ग का Cramond Beach बना 'त्रिवेणी संगम' I प्रयागराज की बेटी ने स्कॉटलैंड में सूर्य देव को को अर्घ्य दिया
एडिनबर्ग की ठंडी रेत पर 'मिनी-भारत': स्कॉटलैंड में छठ पूजा | डॉ. ईशान्या राज
भारत की आध्यात्मिक नगरी, प्रयागराज की प्रतिष्ठित क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक, डॉ. ईशान्या राज, ने सात समंदर पार, यूनाइटेड किंगडम की राजधानी स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग शहर स्थित रमणीय क्रैमंड बीच (Cramond Beach) पर छठ महापर्व का भव्य और अनुष्ठानिक आयोजन कर एक ऐतिहासिक मिसाल कायम की। उत्तर भारत की जड़ों से जुड़ी इस आस्था को विदेश की ठंडी रेत पर पूरे श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाकर, उन्होंने भारतीय संस्कृति की अमरता को सिद्ध किया।

आस्था का दिव्य संगम: एडिनबर्ग के तट पर भारतीय परंपरा
एडिनबर्ग के क्रैमंड बीच का शांत वातावरण, जहां उत्तरी सागर की लहरें टकराती हैं, उस दिन एक मिनी-भारत का दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। डॉ. ईशान्या राज, पारंपरिक छठ व्रतियों के परिधान (साड़ी) में, पूरी पवित्रता और नियमों के साथ छठ की सामग्री लेकर उपस्थित हुईं। उन्होंने बांस की टोकरी (सूप) में ठेकुआ, फलों के प्रसाद और मिट्टी के दीपक सजाए। उनकी यह पहल वहां मौजूद अप्रवासी भारतीय समुदाय (NRI) के लिए एक गहरा भावनात्मक क्षण थी, जिसने उन्हें अपनी जड़ों से सीधे जोड़ दिया।

उन्होंने जब डूबते हुए और उगते हुए सूर्य देव (भगवान भास्कर) को अर्घ्य दिया, तब स्कॉटलैंड के क्षितिज पर भारतीय आस्था का यह दिव्य संगम देखने लायक था। ऐसा लगा मानो प्रयागराज के त्रिवेणी संगम की पवित्रता एडिनबर्ग के तट तक पहुंच गई हो।
डॉ. ईशान्या राज का संदेश: आत्म-अनुशासन की वैश्विक प्रासंगिकता
छठ पूजा के कठिन 36 घंटे के निर्जला व्रत के बाद, डॉ. ईशान्या राज ने अपनी आस्था और इस पर्व के महत्व को शब्दों में पिरोया। उनके विचार आधुनिक जीवनशैली और प्राचीन संस्कारों के बीच एक सुंदर पुल का निर्माण करते हैं।
उन्होंने कहा:
“देश से दूर रहकर भी हमारी अडिग आस्था और अटूट संस्कार कभी दूर नहीं हो सकते। छठ केवल एक पर्व नहीं है, यह आत्मानुशासन, नारी शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का विराट प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना और अपने मन को शुद्ध रखना, दुनिया के किसी भी कोने में जीवन जीने का सर्वोत्तम मार्ग है।”
डॉ. राज ने विशेष रूप से यह बल दिया कि छठ महापर्व के नियम-निष्ठा और कठोर तपस्या महिलाओं की आंतरिक शक्ति (नारी शक्ति) को प्रदर्शित करते हैं, जो आधुनिक समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत है।

सांस्कृतिक विरासत और प्रेरणा
विदेश की धरती पर मनाए गए इस छठ पर्व ने न केवल ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय समुदाय को अपने सांस्कृतिक मूल्यों पर गर्व का एहसास कराया, बल्कि उन युवाओं को भी प्रेरणा दी जो वैश्विक परिवेश में अपनी संस्कृति और जड़ों से थोड़ा विमुख हो रहे हैं। यह दृश्य उन्हें याद दिलाता है कि उनकी पहचान उनकी विरासत में निहित है।

प्रयागराज (जहां से उनकी जड़ें जुड़ी हैं) से लेकर एडिनबर्ग के क्रैमंड बीच तक उनकी यह अडिग आस्था यही संदेश देती है कि आधुनिक जीवनशैली और वैश्विक परिवेश के बीच संस्कारों की निरंतरता ही हमारी सबसे बड़ी विरासत है। डॉ. ईशान्या राज का मानना है कि हमें दुनिया के किसी भी कोने में प्रगति करनी चाहिए, लेकिन अपनी मिट्टी की पहचान और आध्यात्मिक चेतना को सदैव अपने साथ रखना चाहिए। यह आयोजन भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहुँच और लचीलेपन का एक शानदार उदाहरण बन गया।