इजराइल-ईरान संघर्ष में अमेरिका की सीधी सैन्य भागीदारी: ट्रंप ने ईरानी परमाणु केंद्रों पर हमले की पुष्टि की, शांति स्थापित करने की मांग

इजराइल-ईरान संघर्ष में अमेरिका की सीधी सैन्य भागीदारी: ट्रंप ने ईरानी परमाणु केंद्रों पर हमले की पुष्टि की, शांति स्थापित करने की मांग

इजराइल-ईरान संघर्ष में अमेरिका की सीधी सैन्य भागीदारी: ट्रंप ने ईरानी परमाणु केंद्रों पर हमले की पुष्टि की, शांति स्थापित करने की मांग

वॉशिंगटन, 22 जून । मध्य-पूर्व में इजराइल और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष उस समय एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया, जब अमेरिका ने इस तनाव में सीधे तौर पर हस्तक्षेप करते हुए ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर बड़ा हमला किया। अमेरिकी रक्षा विभाग के सूत्रों और बाद में राष्ट्रपति की पुष्टि के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु केंद्रों - फोर्डो (Fordo), नतांज (Natanz) और एस्फहान (Esfahan) को निशाना बनाते हुए उन पर बमबारी की। अमेरिका ने दावा किया है कि इस सुनियोजित हमले में ये तीनों साइट्स पूरी तरह तबाह हो गई हैं।

यह महत्वपूर्ण और अप्रत्याशित सैन्य कार्रवाई भारतीय समयानुसार रविवार की सुबह लगभग 4:30 बजे की गई। इस हमले की जानकारी सामने आते ही पूरे क्षेत्र और वैश्विक स्तर पर चिंता और तनाव की लहर दौड़ गई।

इस सैन्य अभियान के कुछ ही देर बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित किया और इस कार्रवाई की पुष्टि की। अपने संबोधन में, ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब ईरान को आक्रामकता का रास्ता छोड़कर शांति स्थापित करने की दिशा में बढ़ना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान इस मांग को अनसुना करता है और अपने व्यवहार में बदलाव नहीं लाता है, तो भविष्य में अमेरिका की ओर से होने वाले हमले कहीं अधिक भीषण और बड़े पैमाने पर होंगे, जिसके परिणाम ईरान के लिए बहुत हानिकारक होंगे।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर भी एक पोस्ट के जरिए इस अमेरिकी सैन्य अभियान की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि अमेरिका ने जिन तीन प्रमुख ईरानी परमाणु साइट्स को निशाना बनाया है, वे फोर्डो, नतांज और एस्फहान में स्थित हैं। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में आगे बताया, "हमने इन तीनों महत्वपूर्ण परमाणु ठिकानों पर एक साथ कई बम गिराए हैं और उन्हें निष्क्रिय कर दिया है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस अभियान में शामिल हमारे सभी लड़ाकू विमान पूरी तरह सुरक्षित रूप से अपने बेस पर लौट आए हैं। मैं अपने बहादुर अमेरिकी जाबाजों को इस असाधारण सफलता के लिए बधाई देता हूँ। दुनिया में ऐसी दूसरी कोई सैन्य शक्ति नहीं है जो इतनी सटीकता और प्रभावशीलता से यह कर सके।"

ट्रंप ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों को निशाना बनाकर चलाए गए इस 'बड़ा हमला' अभियान को लेकर अपने राष्ट्रव्यापी संबोधन में विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इस कदम को उठाने से बचने के लिए हर संभव प्रयास किया था, लेकिन ईरान के लगातार उकसावे वाले व्यवहार और उसके परमाणु कार्यक्रम की प्रगति को देखते हुए उनके पास कोई अन्य "विकल्प नहीं था"। उन्होंने कहा कि अब ईरान के पास अब भी मौका है कि वह विनाश के मार्ग से हटकर शांति के रास्ते पर लौट आए और इस क्षेत्रीय युद्ध को समाप्त करे। राष्ट्रपति ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर ईरान ने इस हमले का पलटवार करने की कोशिश की, तो अमेरिका पूरी ताकत से जवाबी हमला करेगा। उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा, "शांति नहीं तो विनाश होगा।" ट्रंप ने अपने संबोधन में यह भी एक महत्वपूर्ण खुलासा किया कि इस प्रारंभिक चरण में "अभी सभी लक्ष्यों पर हमले" नहीं किए गए हैं, जो इस बात का संकेत है कि यदि आवश्यक हुआ तो अमेरिका भविष्य में और भी लक्षित हमले कर सकता है। उन्होंने अंत में इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका ईरान के परमाणु संयंत्रों को पूरी तरह और स्थायी रूप से नष्ट करने के अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ है।