वाराणसी में गमगीन माहौल में मना चेहल्लुम, 'या हुसैन' की सदाओं से गूंजे मातमी जुलूस

—शहर भर में अलग-अलग इलाकों से निकले अलम, ताबूत, ताजिया, दुलदुल के जुलूस

वाराणसी में गमगीन माहौल में मना चेहल्लुम, 'या हुसैन' की सदाओं से गूंजे मातमी जुलूस

वाराणसी, 04 अगस्त । उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में मंगलवार को शिया समुदाय ने कर्बला के शहीदों, हजरत इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों की शहादत की याद में चेहल्लुम पूरे अकीदत और गमगीन माहौल में मनाया। शहर के विभिन्न इलाकों से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में 28 मातमी अंजुमनों ने अलम, ताबूत, ताजिया, दुलदुल और अमारी के जुलूस निकाले। नोहाख्वानी और मातम के बीच "या हुसैन, या हुसैन" की सदाओं से शिया समुदाय बहुल क्षेत्र और जुलूस का पारम्परिक मार्ग गुंजायमान रहा।

चेहल्लुम के अवसर पर लगभग 400 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक काली तुरबत का अलम पूर्वाह्न 11 बजे दालमंडी स्थित इमामबाड़ा कच्ची सराय से निकाला गया। जुलूस नई सड़क, शेख सलीम फाटक, कालीमहाल और पितरकुंडा होते हुए दरगाह-ए-फातमान पहुंचकर संपन्न हुआ। पूरे राह बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने मातम किया और नोहा पढ़कर इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि अर्पित की।

दोषीपुरा स्थित इमामबारादरी से अंजुमन अजादारे हुसैनी के नेतृत्व में अलम, ताजिया और दुलदुल का जुलूस निकाला गया। जुलूस से पहले मजलिस आयोजित हुई, जिसके बाद पारंपरिक मार्ग से होते हुए जुलूस लाट सरैया स्थित सदर इमामबाड़ा पहुंचकर समाप्त हुआ।

इसी तरह अर्दली बाजार में अंजुमन इमामिया की ओर से ताबूत, अलम, दुलदुल और अमारी का जुलूस निकाला गया, जिसमें विभिन्न मातमी अंजुमनों ने नौहाख्वानी और मातम किया। इसके अलावा शिवपुर में अंजुमन पंजेतनी, मुकीमगंज-तेलियाना में अंजुमन नसीरुल मोमिनीन, दालमंडी चौक में अंजुमन हैदरी, दोषीपुरा में अंजुमन जाफरिया एवं जाफरिया कदीम, तथा शिवाला में अंजुमन गुलजार-ए-अब्बासिया और कासिमिया अब्बासिया की ओर से भी मातमी जुलूस निकाले गए।

रामनगर, चौहट्टा लाल खां, दुल्हीपुर, बजरडीहा, मदनपुरा और अन्य क्षेत्रों में भी चेहल्लुम के अवसर पर मातमी जुलूस निकाले गए। कालीमहाल स्थित शिया मस्जिद हंकारटोला से मातमी अंजुमन जव्वादिया रजिस्टर्ड द्वारा अलम और ताबूत का जुलूस निकाला गया। वहीं, मदनपुरा से अहलेसुन्नत समुदाय ने भी ताजिया का जुलूस निकाला। यह जुलूस पारंपरिक मार्ग से होता हुआ दरगाह-ए-फातमान पहुंचकर संपन्न हुआ।

हजरत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन की शहादत के 40 दिन पूरे होने पर चेहल्लुम मनाया जाता है। उनके अनुसार यह परंपरा पिछले लगभग 1385 वर्षों से निरंतर चली आ रही है और आज भी पूरे अकीदत के साथ निभाई जा रही है।