उप्र में बाढ़ प्रभावित लोगों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएं अधिकारी : राहत आयुक्त

एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी एवं चिकित्सा दल तैनात

उप्र में बाढ़ प्रभावित लोगों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएं अधिकारी : राहत आयुक्त

लखनऊ, 18 अगस्त  उत्तर प्रदेश के राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने मंगलवार को प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संचालित राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा दिये गये निर्देशों के क्रम में जनपदीय अधिकारियों से समन्व्य स्थापित करते हुए बाढ़ से संबंधित कार्यों का अनुश्रवण करते हुए निगरानी की जा रही है। राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे लोगों को आवश्यकतानुसार बाढ़ राहत शिविरों अथवा अन्य सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए तथा प्रभावित परिवारों को भोजन, चिकित्सा सुविधा एवं आवश्यक राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

राहत आयुक्त ने निर्देश दिए कि सभी बाढ़ चौकियों को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए तथा नदियों के जलस्तर एवं बाढ़ की स्थिति पर निरंतर निगरानी की जाए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त नाव, मोटर बोट, बचाव दल एवं अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध रखते हुए जान-माल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों, कार्यवाहियों एवं अंतर्विभागीय समन्वय की समीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की संयुक्त टीम द्वारा बाढ़ से पूर्व बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, आजमगढ़, मऊ एवं बलिया सहित 06 जनपदों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। इस दौरान मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों एवं अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय बैठकें आयोजित कर बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की गई। टीम द्वारा बाढ़ शरणालयों एवं मॉडल बाढ़ शरणालयों, राहत किट के नमूनों, राहत एवं बचाव दलों की तैनाती तथा बाढ़ प्रभावित ग्रामों में की गई तैयारियों एवं कार्यवाहियों का भी निरीक्षण किया गया।

राहत आयुक्त ने बताया कि बाढ़ प्रभावित जनपदों में प्रभारी मंत्रियों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा भी स्थलीय निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया जा रहा है तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए जा रहे हैं। राहत आयुक्त कार्यालय में स्थित कंट्रोल रूम से लगातार बाढ़ प्रभावित जनपदों से सम्पर्क किया जा रहा है तथा 1070 पर आर रही काल पर तत्काल कार्यवाही की जा रही है।

उन्होंने बताया कि 01 अगस्त से 18 अगस्त 2026 तक मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों को आमजन तक पहुंचाने के लिए कुल 1,40,52,16,262 एसएमएस (SMS) अलर्ट भेजे गए हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से भी आमजन को विभिन्न आपदाओं से बचाव एवं सुरक्षा के संबंध में निरंतर जागरूक किया जा रहा है। राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा संचालित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से आपदा संबंधी महत्वपूर्ण सूचनाएं, चेतावनियां एवं बचाव संबंधी उपाय नियमित रूप से साझा किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले एक माह में राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट को लगभग 25 लाख लोगों ने देखा तथा साझा किया।

प्रदेश में बाढ़ की स्थिति

राहत आयुक्त ने बताया कि प्रदेश में अब तक बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रूखाबाद, गौतमबुद्धनगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर एवं उन्नाव सहित कुल 13 जनपदों के 173 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। वर्तमान में बाढ़ की स्थिति सामान्य एवं नियंत्रण में है। संबंधित जिलाधिकारी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा, राहत एवं बचाव की समुचित तैयारियों के साथ सतर्क हैं।

प्रदेश में अब तक लगभग 13,058 हेक्टेयर क्षेत्रफल तथा 84,362 लोग बाढ़ प्रभावित हुए हैं। आवश्यकता के अनुसार, प्रभावित लोगों को बाढ़ राहत शिविरों एवं अन्य सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है। प्रदेश में कुल 1,589 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं, जिनके माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की निरंतर निगरानी की जा रही है तथा आवश्यकता पड़ने पर राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक 669 राहत चौपाल आयोजित की गई हैं तथा 12,487 आपदा मित्रों को फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है।

प्रदेश में 1,263 बाढ़ शरणालय बनाए गए हैं, जिनमें से वर्तमान में 41 बाढ़ शरणालयों का उपयोग किया जा रहा है। इन शरणालयों में 1,045 व्यक्ति रह रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 4,845 व्यक्तियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रभावित जनपदों में 428 नाव एवं मोटर बोट सक्रिय हैं तथा 1,101 स्थानीय गोताखोर तैनात हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच अब तक 15,238 राहत खाद्यान्न पैकेट एवं 30,316 लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। बाढ़ के कारण 94 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें से 65 मकानों के संबंध में सहायता राशि वितरित की जा चुकी है।

पशुधन एवं स्वास्थ्य सेवाएं

राहत आयुक्त ने बताया कि बाढ़ से अब तक 6,067 पशु प्रभावित हुए हैं। प्रभावित पशुओं के लिए 208 कुंतल भूसा वितरित किया गया है। 11,465 बीमार पशुओं का उपचार तथा 4,04,036 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए 43,612 क्लोरीन टैबलेट तथा 23,476 ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं। बाढ़ प्रभावित जनपदों में 724 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं तथा 534 एम्बुलेंस उपलब्ध हैं। मच्छरजनित रोगों की रोकथाम के लिए 1,468 गांवों में लार्वीसाइडल का छिड़काव किया गया है। अब तक 19,406 लोगों का उपचार किया गया है तथा 566 व्यक्तियों को एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध कराया गया है।

एनडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं पीएसी की तैनाती

राहत आयुक्त ने बताया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश में एनडीआरएफ की कुल 16 टीमें तैनात की गई हैं। बहराइच, बलिया, फर्रूखाबाद, गोरखपुर, कासगंज, कानपुर नगर, प्रयागराज, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, लखनऊ, गौतमबुद्धनगर एवं बुलंदशहर में एक-एक तथा वाराणसी एवं गाजियाबाद में दो-दो एनडीआरएफ टीमें तैनात हैं। इसके अतिरिक्त अयोध्या, बलरामपुर, गोंडा, गोरखपुर, महराजगंज, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, बदायूं, हरदोई, मिर्जापुर, जालौन, कुशीनगर, मथुरा, गाजियाबाद, सहारनपुर एवं पीलीभीत में एक-एक एसडीआरएफ टीम तथा लखनऊ में एसडीआरएफ की दो टीमें तैनात की गई हैं। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रदेश के 52 जनपदों में पीएसी की तैनाती भी की गई है।

वर्षा की स्थिति

राहत आयुक्त ने बताया कि प्रदेश में जून माह से अब तक सामान्य वर्षा के सापेक्ष 80.1 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई है। मुजफ्फरनगर, संभल, मेरठ, एटा, फिरोजाबाद एवं हमीरपुर सहित 06 जनपदों में सामान्य से अधिक, लगभग 120 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई है। 29 जनपदों में 80 से 120 प्रतिशत, 20 जनपदों में 60 से 80 प्रतिशत तथा 13 जनपदों में 40 से 60 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई है। मऊ, कुशीनगर, जौनपुर, भदोही, कानपुर देहात, पीलीभीत एवं देवरिया सहित 07 जनपदों में 40 प्रतिशत से कम वर्षा दर्ज की गई है।

नदियों के जलस्तर एवं बाढ़ पूर्वानुमान

राहत आयुक्त ने बताया कि बाराबंकी में एल्गिन ब्रिज के निकट घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बदायूं के कचला ब्रिज एवं फर्रूखाबाद के फतेहगढ़ में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान पर है। लखीमपुर खीरी के पलियाकलां एवं शारदानगर में शारदा नदी तथा अयोध्या एवं बलिया के तुर्तीपार में घाघरा नदी एवं श्रावस्ती के भिनगा में नदी का जलस्तर खतरे के निशान के आसपास है।

उन्होंने बताया कि धर्मनगरी, गढ़मुक्तेश्वर, कचला ब्रिज (बदायूं), फतेहगढ़ एवं अंकिनघाट (कानपुर नगर) में गंगा नदी, रिहंद बांध में रिहंद नदी, बाणसागर बांध में सोन नदी, एल्गिन ब्रिज (बाराबंकी), अयोध्या एवं तुर्तीपार (बलिया) में घाघरा नदी तथा कुशीनगर में गंडक नदी के संबंध में बाढ़ की संभावना का पूर्वानुमान है।

राहत आयुक्त ने कहा कि शासन एवं जिला प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।