शोध का लक्ष्य समाज की समस्याओं का समाधान हो, सिर्फ अकादमिक उपलब्धि नहीं: प्रो. केबी पांडेय

शोध का लक्ष्य समाज की समस्याओं का समाधान हो, सिर्फ अकादमिक उपलब्धि नहीं: प्रो. केबी पांडेय

शोध का लक्ष्य समाज की समस्याओं का समाधान हो, सिर्फ अकादमिक उपलब्धि नहीं: प्रो. केबी पांडेय

प्रयागराज, 24 अगस्त । कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसका प्रभाव जीवन के लगभग हर क्षेत्र में दिखाई देगा। उक्त बात सोमवार को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद (ट्रिपल आईटी) के झलवा परिसर में प्रथम शोध संगोष्ठी-2026 का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति एवं पूर्व सिविल सेवक प्रो. केबी पांडेय ने कही।

उन्होंने शोधार्थियों से नई तकनीकों की संभावनाओं को समझकर उनका उपयोग समाज के हित में करने का आह्वान किया।

एक दिवसीय संगोष्ठी में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और अनुभवी विशेषज्ञों ने शोधार्थियों से संवाद किया।

प्रो. पांडेय ने अपने संबोधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग और इसकी व्यापक संभावनाओं को रोचक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने शोधार्थियों को बदलती तकनीक के साथ खुद को तैयार करने और नवाचार पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

आईआईटी कानपुर के डीन (अकादमिक) प्रो. शलभ ने शोधार्थियों से अपने शोध के उद्देश्य को स्पष्ट रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सार्थक शोध के लिए स्पष्ट सोच, निरंतर प्रयास और अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी है।

आईबीएम रिसर्च इंडिया की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. अनुपमा रे ने क्वांटम प्रौद्योगिकी के उभरते उपयोगों पर जानकारी दी। उन्होंने चिकित्सा विज्ञान और अभियांत्रिकी समेत विभिन्न क्षेत्रों में क्वांटम तकनीक की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। साथ ही क्वांटम और पारंपरिक तकनीक के बीच अंतर को भी समझाया।

आईआईआईटी, इलाहाबाद के निदेशक एवं मुख्य संरक्षक प्रो. मुकुल शारद सुतावने ने शोधार्थियों से नवाचारपूर्ण, प्रभावशाली और समाज के लिए उपयोगी शोध करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शोध का उद्देश्य केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित नहीं होना चाहिए। शोध के माध्यम से वास्तविक जीवन की समस्याओं का समाधान और समाज व राष्ट्र के विकास में योगदान किया जाना चाहिए।

शोध एवं अवसंरचना कार्य के अधिष्ठाता एवं संरक्षक प्रो. प्रमोद कुमार ने बताया कि संगोष्ठी में विभिन्न क्षेत्रों के कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल हुए। इनमें प्रो. अशोक प्रताप अरोड़ा, प्रो. माधव गोरे, प्रो. मुकेश कुमार, प्रो. पार्थ प्रतिम रॉय, प्रो. मसूद हुसैन सिद्दीकी, डॉ. संजय सिंह, डॉ. प्रांजल चंद्र, डॉ. अतुल कुमार, डॉ. हरि ओम अग्रवाल और डॉ. सैयद मजाहिर रिजवी शामिल रहे।

संगोष्ठी के दूसरे सत्र में शोधार्थियों ने मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने शोध कार्य और निष्कर्ष प्रस्तुत किए। अनुप्रयुक्त विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी तथा प्रबंधन अध्ययन विभागों के शोधार्थियों ने इसमें भाग लिया। विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियों का मूल्यांकन कर शोधार्थियों को आवश्यक सुझाव और मार्गदर्शन दिया। प्रत्येक विभाग में मौखिक और पोस्टर प्रस्तुति की श्रेणियों में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान का चयन किया गया।

कार्यक्रम में ‘शोधार्थी व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में संतुलन कैसे बनाए रखें’ विषय पर विशेष परिचर्चा भी हुई। शोधार्थियों ने अपनी चुनौतियां साझा कीं और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। परिचर्चा में शोध कार्य, व्यावसायिक आकांक्षाओं, व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया।

प्रथम शोध संगोष्ठी-2026 में शोधार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। आयोजन ने शोध, नवाचार, मार्गदर्शन और आपसी सहयोग के लिए प्रभावी मंच प्रदान किया। संस्थान की ओर से कहा गया कि इस तरह के आयोजन शोध की संस्कृति को मजबूत करने के साथ ऐसे शोध को बढ़ावा देंगे, जो समाज और राष्ट्र की वास्तविक समस्याओं के समाधान में उपयोगी साबित हों।