चीनी मिलों की ऊर्जा खपत घटाने के लिए NSI और BEE में समझौता, 200 से अधिक मिलों की ऑडिट रिपोर्ट का होगा अध्ययन
कानपुर स्थित राष्ट्रीय शर्करा संस्थान और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के बीच करार; भाप, बिजली और उत्पादन प्रक्रियाओं की समीक्षा कर ऊर्जा बचत के उपाय सुझाए जाएंगे।
कानपुर, 17 अक्टूबर। चीनी मिलों में ऊर्जा की खपत कम करने और उत्पादन लागत घटाने के लिए 200 से अधिक मिलों की ऑडिट रिपोर्टों का अध्ययन किया जाएगा। इससे ऊर्जा बचत के उपाय तलाशने और उत्पादन प्रक्रिया को अधिक किफायती बनाने में मदद मिलेगी।
यह बातें शनिवार को राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआई) कानपुर की निदेशक प्रो. सीमा परोहा ने कही। एनएसआई कानपुर और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) के बीच आज इस संबंध में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। बीईई के सचिव अरिजीत सेनगुप्ता और एनएसआई की निदेशक प्रो. सीमा परोहा ने अपने-अपने संस्थानों की ओर से करार किया। यह समझौता दोनों संस्थानों के बीच पहले से स्थापित साझेदारी को आगे बढ़ाएगा।
इसके तहत एनएसआई विभिन्न राज्यों की 200 से अधिक चीनी मिलों की ऊर्जा ऑडिट रिपोर्टों का मूल्यांकन करेगा। चुनिंदा मिलों का स्थलीय निरीक्षण कर ऊर्जा के इस्तेमाल और संयंत्रों की वास्तविक कार्यप्रणाली का आकलन भी किया जाएगा।
अध्ययन में गन्ने की पेराई, बॉयलर संचालन, चीनी निर्माण की विभिन्न प्रक्रियाओं और सह-उत्पादन प्रणालियों में ऊर्जा खपत की समीक्षा होगी। इसके आधार पर भाप और बिजली की खपत को अनुकूलित करने, उपकरणों की कार्यक्षमता बढ़ाने और तकनीकी व आर्थिक रूप से व्यवहार्य ऊर्जा संरक्षण उपाय सुझाए जाएंगे।
इस अवसर पर बीईई के संयुक्त निदेशक विवेक नेगी और एनएसआई में शर्करा अभियांत्रिकी के आचार्य डॉ. विनय कुमार मौजूद रहे। इस पहल से चीनी मिलों की परिचालन लागत कम करने, ऊर्जा बचत बढ़ाने और टिकाऊ उत्पादन को प्रोत्साहित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।