जस्टिस चेलमेश्वर बोले- महंगी होने के साथ घट रही विधि शिक्षा की गुणवत्ता, नैतिक मूल्यों में गिरावट चिंताजनक

प्रयागराज में विधि छात्रों के राष्ट्रीय कन्वेंशन में 22 राज्यों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा; प्रशांत भूषण ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए नागरिकों को जागरूक रहने की अपील की।

जस्टिस चेलमेश्वर बोले- महंगी होने के साथ घट रही विधि शिक्षा की गुणवत्ता, नैतिक मूल्यों में गिरावट चिंताजनक

प्रयागराज, 04 अक्टूबर। विधि की शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है और इसके साथ उसकी गुणवत्ता में भी कमी आ रही है। विधिक नैतिकता और मूल्यों में गिरावट चिंता का विषय है।

उक्त बात रविवार को सरदार पटेल सेवा संस्थान, अलोपीबाग में एआईडीएसओ की पहल पर आयोजित विधि छात्रों के राष्ट्रीय कन्वेंशन को संबोधित करते हुए उच्चतम न्यायालय से सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा। उन्होंने कहा कि कभी विधि का पेशा समाज में आदर्श माना जाता था, लेकिन भ्रष्टाचार और अनैतिक साधनों के बढ़ते इस्तेमाल से इसकी गरिमा प्रभावित हुई है। कन्वेंशन में 22 राज्यों से आए विधि छात्र प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत समिति के अध्यक्ष विनोद तिवारी ने महापुरुषों के विचारों पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन कर की। इसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुति हुई। स्वागत समिति के सचिव एवं अधिवक्ता राजवेंद्र सिंह ने उद्घाटन भाषण दिया।

जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा न्याय व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने विधि के छात्रों और युवाओं से पेशेवर नैतिकता तथा संवैधानिक मूल्यों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए नागरिकों को जागरूक रहना जरूरी है। उन्होंने विधि छात्रों और युवा वकीलों से नागरिक अधिकारों तथा विधिक नैतिकता के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

मानवाधिकार संगठन सीपीडीआरएस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष द्वारकानाथ रथ ने कहा कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए छात्रों और युवाओं को आगे आना चाहिए। उन्होंने लोकतांत्रिक सोच रखने वाले लोगों के बीच एकजुटता की जरूरत बताई।

एआईडीएसओ के राष्ट्रीय महासचिव शिवशीष प्रहराज ने कहा कि विधिक शिक्षा का संकट केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध न्याय व्यवस्था से भी है। उन्होंने बताया कि देश की अदालतों में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। ऐसे में ऐसी विधि शिक्षा की जरूरत है, जो छात्रों को रोजगार के साथ लोकतांत्रिक अधिकारों, धर्मनिरपेक्षता और पेशेवर नैतिकता के प्रति भी संवेदनशील बनाए।

कन्वेंशन में विधि छात्रों की शिक्षा, फीस, रोजगार, छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप, आधारभूत सुविधाओं और कानूनी पेशे में बढ़ती असमानताओं सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिवक्ता, नागरिक और छात्र शामिल हुए। अध्यक्षता एआईडीएसओ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अधिवक्ता रिम्मी बघेला ने की। सस्ती और सर्वसुलभ विधि शिक्षा तथा न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ कन्वेंशन का समापन हुआ।