सीएम योगी ने किया पं. राधेश्याम कथावाचक की प्रतिमा का अनावरण, जीआईसी ऑडिटोरियम बना स्मृति भवन

सीएम योगी ने किया पं. राधेश्याम कथावाचक की प्रतिमा का अनावरण, जीआईसी ऑडिटोरियम बना स्मृति भवन

सीएम योगी ने किया पं. राधेश्याम कथावाचक की प्रतिमा का अनावरण, जीआईसी ऑडिटोरियम बना स्मृति भवन

बरेली, 30 जून  । हिन्दी साहित्य और लोकनाट्य परंपरा के महान नाटककार एवं प्रसिद्ध कथावाचक पंडित राधेश्याम कथावाचक की स्मृतियों को संजोने की दिशा में मंगलवार को बड़ा कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीआईसी ऑडिटोरियम में पंडित राधेश्याम कथावाचक की प्रतिमा का अनावरण किया। इसके साथ ही जीआईसी ऑडिटोरियम का नाम बदलकर ‘पं. राधेश्याम कथावाचक स्मृति भवन’ कर दिया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम की शुरुआत ‘‘सियावर रामचंद्र की जय’’ के उद्घोष के साथ की। उन्होंने कहा कि पं. राधेश्याम कथावाचक ने अपनी लेखनी और कथावाचन के माध्यम से भारतीय संस्कृति, रामकथा और सनातन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। ऐसे महान साहित्यकारों और सांस्कृतिक विभूतियों का सम्मान करना समाज और शासन दोनों का दायित्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि जिनकी कथा सुनते हुए हम बड़े हुए, आज उनकी प्रतिमा का अनावरण करने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने कहा कि जो समाज अपनी विरासत का सम्मान और संरक्षण करता है, उसी के विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। विरासत का सम्मान हमारी प्रगति का आधार है।

उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम कथा के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य किया। तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के जरिए राम नाम की शक्ति का एहसास कराया। उसी परंपरा को आधुनिक काल में पं. राधेश्याम कथावाचक ने आगे बढ़ाया। उनके संवाद और रचनाएं रामलीला मंचन का आधार बने। उन्होंने रामायण को सरल भाषा और लोक व्यवहार की शैली में प्रस्तुत कर जन-जन तक पहुंचाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि त्रेतायुग में महर्षि वाल्मीकि, मध्यकाल में गोस्वामी तुलसीदास और आधुनिक काल में पं. राधेश्याम कथावाचक ने समाज को जोड़ने का काम किया। सनातन संस्कृति को मजबूती देने वाले ऐसे महापुरुषों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि पं. राधेश्याम कथावाचक का निधन वर्ष 1983 में हुआ, लेकिन उन्हें वह सम्मान नहीं मिल सका जिसके वह हकदार थे। उन्होंने निर्देश दिए कि पं. राधेश्याम के आवास को पर्यटन विभाग के सहयोग से म्यूजियम के रूप में विकसित किया जाए। इसमें उनकी रचनाओं और स्मृतियों को सुरक्षित रखा जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान को जान सकें।

कार्यक्रम में बताया गया कि पं. राधेश्याम कथावाचक का जन्म 25 नवंबर 1890 को बरेली शहर के बिहारीपुर मोहल्ले में हुआ था। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना ‘राधेश्याम रामायण’ है, जिसे उन्होंने खड़ी बोली और लोकनाट्य शैली में 25 खंडों में लिखा था। मात्र 17 वर्ष की उम्र में रचित इस कृति ने देशभर में लोकप्रियता हासिल की। उनके जीवनकाल में इसकी हिन्दी और उर्दू में करीब पौने दो करोड़ से अधिक प्रतियां प्रकाशित हुईं।

पं. राधेश्याम कथावाचक को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रपति भवन बुलाकर राम कथा सुनी थी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए धन संग्रह के दौरान उन्होंने अपनी एक वर्ष की आय भी महामना मदन मोहन मालवीय को समर्पित कर दी थी।

कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह, वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार, सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, महापौर डॉ. उमेश गौतम, सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार, विधायक संजीव अग्रवाल सहित प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।