श्री राम जन्मभूमि में चांदी के झूले में विराजमान हुए रामलला, भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

श्री राम जन्मभूमि में चांदी के झूले में विराजमान हुए रामलला, भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

श्री राम जन्मभूमि में चांदी के झूले में विराजमान हुए रामलला, भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

अयोध्या, 16 अगस्त । भगवान राम की नगरी में सावन झूला मेला को लेकर पूरी नगरी में उत्साह नजर आ रहा है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चांदी के झूले पर भगवान राम के साथ भरत लक्ष्मण और शत्रुघ्न झूलनोत्सव का आनंद ले रहे हैं, दूर दराज से अयोध्या पहुंचे श्रद्धालु भी भगवान के विग्रह को झूलन में दर्शन कर रहे हैं।

राम जन्मभूमि में रविवार को भगवान चांदी के हिंडोले पर सवार हुए, भगवान के उत्सव विग्रहों का झूलन स्वरूप का दर्शन करके श्रद्धालु अभिभूत हैं। पिछले वर्ष की भाँति इस वर्ष भी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने ऐसी व्यवस्था की है कि भगवान राम लला अपने चारों भाइयों के साथ झूलन का आनंद ले रहे हैं, उन्हें झूलन झूलाने का सौभाग्य श्रद्धालुओं को भी मिल रहा है। श्री रामजन्मभूमि मंदिर गर्भ ग्रह के ठीक बाहर भगवान राम लला अपने चारों भाइयों के साथ चांदी के हिंडोले पर सवार हैं, जिसकी डोरी दूर तक है। भक्त 20 फीट की दूरी से श्री राम लला को झूलन झूला रहे हैं।

मंदिर की पूजा व्यवस्था के प्रभारी पंडित इंद्र देव ने बताया कि सावन की तृतीया तिथि से भगवान राम लला का झूला कुबेर टीला से शुरू हुआ और आज से जो सावन की पूर्णिमा तक भगवान मंदिर में झूलन पर रहेंगे। इस दरमियान प्रतिदिन भगवान राम लला की प्राचीन प्रतिमा यानी कि वह प्रतिमा जो बाल स्वरूप प्रतिमा चारों भाइयों के साथ रामलला झूलन का आनंद ले रहे हैं। श्रद्धालु 20 फीट की दूरी से भगवान राम लला के झूलन स्वरूप का दर्शन भी कर पाएंगे।

श्री राम मंदिर ट्रस्ट ने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भगवान श्रीरामलला सरकार सहित चारों भाईयों के उत्सव विग्रहों की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। उत्सव विग्रहों ने पालकी में विराजमान होकर मंदिर परिसर स्थित सभी देवालयों की परिक्रमा की। भक्तिमय वातावरण में संपूर्ण परिसर श्रीराम के जयघोष से गुंजायमान रहा।

परिक्रमा के उपरान्त कुबेर टीला पर भगवान के उत्सव विग्रहों का पारंपरिक झूला उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इसके पश्चात उत्सव विग्रह पुनः श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में पधारे, जहां गर्भगृह के निकट विधि-विधान और भक्तिभाव के साथ झूला उत्सव मनाया गया।