अयोध्या : धूमधाम से मना सद्गुरु कबीर साहेब का 629वां प्रगट दिवस

अयोध्या : धूमधाम से मना सद्गुरु कबीर साहेब का 629वां प्रगट दिवस

अयोध्या : धूमधाम से मना सद्गुरु कबीर साहेब का 629वां प्रगट दिवस

अयोध्या, 29 जून । अयाेध्या धाम में कबीर मठ जियनपुर महाेबरा बाजार में साेमवार काे सद्गुरु कबीर साहेब की 629वीं जयंती धूमधाम के साथ मनाई गई। जयंती महाेत्सव काे श्रीकबीर धर्म मंदिर सेवा समिति जियनपुर के कार्यवाहक अध्यक्ष आचार्य उमाशंकर दास ने अपना संयाेजन प्रदान किया।

उन्होंने कहा कि सद्गुरु कबीर साहेब के जन्मदिन काे हम सब प्रगट दिवस के रूप में मनाते हैं। क्याेंकि कबीर साहेब काे किसी ने भी जन्म लेते नही देखा और ना ही इसका काेई प्रमाण है। वह वास्तव में लहतारा के तालाब में कमल पुष्प पर प्रगट हुए। जिनका पालन-पाेषण नीमा और नीरू नामक एक जुलाहे दंपत्ति द्वारा किया गया। कबीर साहेब ने हमेशा वाह्य आडंबर और पाखंड वाद का विराेध किया। उन्होंने मगहर से पूरी दुनिया काे मानवता का संदेश दिया। कबीर साहेब दुनिया एक अकेले ऐसे महापुरुष हैं, जिनका मगहर में मंदिर भी है और समाधि भी। जहां पर हिंदू मंदिर में फूल चढ़ाते हैं और मुसलमान समाधि पर चादर। सद्गुरु कबीर के लिए मानवता सबसे बड़ी चीज थी। उनका जीवन मानवता के लिए बीता। उनका दर्शन भारतीय संविधान में निहित है। महात्मा गांधी और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर सद्गुरु कबीर साहेब के विचारों से ओत-प्रोत थे। इसलिए बाबा साहब अंबेडकर ने उनके विचारों को भारतीय संविधान में रखा।

पूर्वांचल विकास बाेर्ड के निवर्तमान सदस्य बाैद्ध अरविंद सिंह पटेल ने कहा कि संत शिराेमणि कबीर साहेब ने संपूर्ण दुनिया काे प्रेम और मानवता का संदेश दिया। उन्होंने संपूर्ण मानवता काे एक सूत्र में पिराेने का काम किया। साथ ही सबकाे संदेश दिया कि आप सब मानवता के लिए काम करें।

वहीं कासु. साकेत महाविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रामचन्दर वर्मा ने कहा कि सद्गुरु कबीर साहेब ने मजहब, पंथ, धर्म सबसे हटकर कार्य किया। उनके अंदर मानवीय संवेदना और मानव एकता की पीड़ा थी। जहां पर भी आज कहीं संघर्ष, पीड़ा हाेती है। वहां कबीर साहेब याद आते हैं।

इस अवसर पर कुशवाहा मंदिर के महंत सनत कुमार दास, महंत तेजपाल दास हनुमानगढ़ी, कबीर आश्रम बड़हरा गाेंडा के महंत विवेक ब्रह्मचारी, संत राधेश्याम दास, रामप्रकाश साहेब, संत निर्भय दास, संत आंधी दास, संत प्रजापति दास, संत रवींद्र दास, संत संताेष साहेब, साहिबी तुलसी, डॉ. अजय सिंह, पार्षद सर्वजीत यादव, प्राचार्य निर्मल वर्मा, डा. गंगाराम, मुलायम यादव, रामअभिलाख वर्मा, अमरनाथ वर्मा, रामजनम वर्मा, डॉ. अजीत यादव, अमिताभ श्रीवास्तव, विष्णु यादव, राकेश वर्मा, मनसुख भाई पटेल, वीरेंद्र माैर्य, जगराम, अंजनी माैर्या, गुरुचरण यादव, राकेश यादव, प्रभात सिंह, विवेक आदि उपस्थित रहे।