इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फायरिंग के आरोपित को दी जमानत, 15 महीने की हिरासत के बाद मिली राहत
रामपुर के कैमरी थाना क्षेत्र के मामले में हाईकोर्ट ने लंबी हिरासत, आपराधिक इतिहास न होने और प्रमुख गवाहों की गवाही पूरी होने को आधार बनाकर सशर्त जमानत मंजूर की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फायरिंग के आरोपित को दी जमानत, 15 महीने से था जेल में
प्रयागराज, 23 जुलाई (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार को रामपुर जिले के कैमरी थाना क्षेत्र के आरोपी इंद्रजीत सिंह की सशर्त जमानत स्वीकार कर ली है। न्यायमूर्ति संतोष राय की एकलपीठ ने यह आदेश दिया। यह इंद्रजीत सिंह की दूसरी जमानत अर्जी थी। इससे पहले उनकी पहली जमानत अर्जी कोर्ट ने 10 सितंबर 2025 को खारिज कर दिया था।
आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी एस मिश्र व चंद्रकेश मिश्रा ने बहस करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को सिविल विवाद के चलते झूठा फंसाया गया है। बताया गया कि आरोपी की ओर से एक सिविल वाद दायर किया गया था, जिसमें सक्षम सिविल कोर्ट ने उनके पक्ष में निषेधाज्ञा आदेश पारित किया था। यह भी दलील दी गई कि आरोपी ने निजी बचाव के तहत चोट पहुंचाई। कोर्ट का ध्यान घटनास्थल के नक्शे की ओर दिलाते हुए कहा गया कि कारतूस आरोपी के घर से बरामद दिखाए गए हैं, लेकिन घटनास्थल की सही स्थिति नक्शे में स्पष्ट नहीं है और घटनास्थल बदलता रहा है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
राज्य की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता का कहना था कि आरोपी की भूमिका गंभीर है और एफआईआर के अनुसार घायल को फायरिंग से चोट पहुंचाने का मुख्य आरोप उन्हीं पर है। गवाहों और स्वयं घायल रियाज़ुद्दीन के बयान में भी आरोपी का नाम लिया गया है, जिसकी पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट से भी होती है। जांच के दौरान आरोपी की निशानदेही पर हथियार भी बरामद हुआ। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के कन्हैया बनाम मध्य प्रदेश राज्य और पंकज बनाम राजस्थान राज्य मामलों के फैसलों का हवाला भी दिया गया।
इस मामले में आरोपी की मां सुखदीप कौर को भी सह-आरोपी बनाया गया था, जिन पर उकसाने का आरोप था। लेकिन जांच अधिकारी को उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले और चार्जशीट में उन्हें यह कहते हुए बरी कर दिया गया कि घटना के समय वे भारत में मौजूद ही नहीं थीं।
मामले में ट्रायल शुरू हो चुका है। अभियोजन पक्ष के दो प्रत्यक्षदर्शी/घायल गवाह नियाज अहमद और रियाजुद्दीन के साथ-साथ तीसरे गवाह आरिफ की गवाही भी पूरी हो चुकी है। कोर्ट ने पाया कि इन प्रमुख गवाहों की गवाही पूरी हो जाने के बाद अब गवाहों को डराने-धमकाने की आशंका नहीं रह जाती।
न्यायालय ने आरोपी की लंबी हिरासत अवधि (करीब 15 महीने), आपराधिक इतिहास न होने, ट्रायल पूरा होने में लगने वाले अनिश्चित समय और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले अधिकारों को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना पारित किया गया है।