पुलिस की गलत सूचना के कारण जेल में बिताने पर अभियुक्त को 50 हजार मुआवजा देने का सरकार को निर्देश
पुलिस की गलत सूचना के कारण जेल में बिताने पर अभियुक्त को 50 हजार मुआवजा देने का सरकार को निर्देश
प्रयागराज, 10 मार्च । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सैंट्रो कार चोरी के आरोपित की जमानत मंजूर करते हुए रिहाई का आदेश दिया है।
कोर्ट ने पुलिस की आपराधिक इतिहास की गलत सूचना देने के कारण 15 दिन बाद जमानत मंजूर होने व इतने समय तक जेल में रहने के लिए आरोपित को 50 हजार रूपये मुआवजा पाने का हकदार माना है और राज्य सरकार को एक माह में भुगतान करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने अलीगढ़ निवासी फुरकान की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए दिया है। सम्बंधित जांच अधिकारी ने एजीए को याची के खिलाफ 12 आपराधिक मामले होने की जानकारी दी थी जबकि अभियुक्त के वकीलों का कहना था कि सिर्फ पांच मामलों का आपराधिक इतिहास है।जिसका खुलासा किया गया है।
याची का कहना था कि वह एफआईआर में नामजद नहीं है। कार चोरी का आरोप बरामदगी को लेकर लगाया गया है। पुलिस चार्जशीट दायर कर चुकी है। अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की जरूरत नहीं है। जमानत पर रिहा होने पर वह आदेश का पालन करेगा।
कोर्ट ने कहा, अभिलेखों के अवलोकन से यह भी स्पष्ट है कि जांच अधिकारी की ओर से कोई दुर्भावना नहीं थी, लेकिन उनकी लापरवाही के कारण गलती हुई। कोर्ट के 23 फरवरी के आदेश के अनुपालन में नवीन अरोरा, एडीजी (तकनीकी सेवाएं) वीडियो कांफ्रेंसिग के माध्यम से उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि सीसीटीवीएनएस के माध्यम से किसी भी आरोपित का आपराधिक इतिहास पता लगाना बहुत आसान है।
कोर्ट ने कहा, प्रतिवादी ने सूचित किया है कि संयुक्त निदेशक (अभियोजन) इलाहाबाद उच्च न्यायालय को आईसीजेएस के माध्यम से केस डायरी प्राप्त करने की सुविधा दी गई है, लेकिन उन्होंने अपने कार्यालय में कर्मचारियों की कमी के कारण इस सुविधा का लाभ उठाने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने वीडियो कांफ्रेंसिंग की बेहतर सुविधा बहाल करने का भी आदेश दिया है।