डिजिटल कॉन्क्लेव में बोले विशेषज्ञ, एआइ को मानव सहयोगी के रूप में देखना जरूरी

डिजिटल कॉन्क्लेव में बोले विशेषज्ञ, एआइ को मानव सहयोगी के रूप में देखना जरूरी

डिजिटल कॉन्क्लेव में बोले विशेषज्ञ, एआइ को मानव सहयोगी के रूप में देखना जरूरी

पूर्वी सिंहभूम, 8 जुलाई  एक्सएलआरआइ में मंगलवार को वार्षिक डिजिटल कॉन्क्लेव ‘री-एनविजन 4.0’ का आयोजन किया गया, जिसका थीम था – द डिजिटल इम्पेरेटिव: बिल्डिंग, लीडिंग एंड सस्टेनिंग ट्रांसफॉर्मेशन।

इस कार्यक्रम में देशभर से आए डिजिटल विशेषज्ञ, कॉर्पोरेट लीडर्स और इनोवेटर्स ने शिरकत की। कॉन्क्लेव की शुरुआत एकेडमिक डीन डॉ संजय के पात्रो, एक्सीड के सीईओ प्रो सुनील सारंगी और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ हिमांशु शेखर के उद्घाटन संबोधन से हुई। वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल परिवर्तन तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि वैचारिक क्रांति है और भविष्य का नेतृत्व तभी सफल होगा जब वह एजाइल रहेगा।

कार्यक्रम के पहले पैनल में क्लब महिंद्रा के सीटीओ विकास श्रीवास्तव ने कहा कि डिजिटल बदलाव तभी पूर्ण होगा जब हम मानवीय जरूरतों से जुड़ें। इस पैनल में रेकेम आरपीजी की सीडीआइओ मेहजबीं ताज आलम, एलटीआई माइंडट्री की पूर्व निदेशक प्रीति सैनी और इनमोबी ग्रुप के सीडीओ रमण श्रीनिवासन ने भी भाग लिया और कहा कि डिजिटल टूल्स की सफलता कोड या एल्गोरिद्म से ज्यादा उसके पीछे की समझ पर निर्भर करती है।

दूसरे पैनल में एआइ युग में नेतृत्व की चुनौतियों पर चर्चा हुई। ओरेकल के भाबानी महाराणा, एचडीएफसी लाइफ के रोहित किलम, किंद्रिल के कंट्री लीडर, आइटीसी लिमिटेड के गौरव शर्मा और फेडबैंक फाइनेंशियल के शिवकुमार नंदीपाटी ने कहा कि एआइ को विकल्प नहीं, मानव सहयोगी के रूप में देखना चाहिए। एआइ के साथ नैतिकता और सहानुभूति जोड़ना आज की सबसे बड़ी नेतृत्व परीक्षा बन चुकी है।

तीसरे पैनल में डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर पर मंथन हुआ। एनएसइ के राजीवन कल्लमपुरम, अडाणी हेल्थकेयर के मनीष कुमार, जेनपैक्ट के चिरदीप भट्टाचार्य और ऑलस्टेट इंडिया के विपिन गुप्ता ने कहा कि डेटा अब संपत्ति नहीं, उत्तरदायित्व बन चुका है। एड्ज कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। आयोजन को सफल बनाने में आशीष पाल, अंशु कुमारी और उनकी टीम की अहम भूमिका रही।