डीजीपी ब्रज लाल की चिंता - 'बांग्लादेशी घुसपैठियों का बड़ा अड्डा बन रहा लखनऊ'
अपने फेसबुक पेज पर एक लंबी चाैड़ी पाेस्ट लिखकर मुख्यमंत्री से की अपील
लखनऊ, 23 अक्टूबर, उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक और वर्तमान में भाजपा से राज्यसभा सदस्य ब्रजलाल ने प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बांगलादेशी घुसपैठियाें की बढ़ती संख्या और इनके अपराधिक कृत्याें पर गहरी चिंता जताई है। उन्हाेंने लखनऊ में रह रहे इन बांग्लादेश के नागरिकाें काे देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए खतरा बताते हुए मुख्यमंत्री से इन्हें वापस भेजने की अपील की है।
पूर्व पुलिस महानिदेशक और भाजपा सांसद ब्रजलाल ने आज अपने फेसबुक पेज पर एक लंबी चाैड़ी पाेस्ट लिखकर मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया है। पूर्व डीजीपी ने सुबह टहलने के दाैरान ऐसे कुछ महिलाओं और पुरुषाें से बातचीत कर उनके मूल निवास के बारे में जानकारी भी करने की बात कही है। यह लाेग खुद काे असम का निवासी हाेने का दावा कर रहे थे, जबकि एक जमाने में खुद पीएसी बटालियन का नेतृत्व करते हुए उन्हाेंने असम में लंबा समय बिताय थ। उन्हें वहां की भाैगाेिलक स्थित के बारे में पूरी तरह से जानकारी है। ब्रजलाल ने इन लाेगाें बांग्लादेश का नागरिक बताते हुए नगर निगम लखनऊ और स्थानीय पुलिस प्रशासन की मंशा पर भी सवाल खड़ा किया। उन्हाेंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री याेगी ही इस पर सख्त फैसला लेकर इन बांग्लादेशियाें काे वापस भेज सकते हैं।
अब पढ़िए क्या कुछ लिखा है-
पूर्व पुलिस महानिदेशक ब्रजलाल ने अपनी पाेस्ट में लिखा है, "मैं गोमतीनगर विस्तार में जब सुबह वॉक करता हूँ तो मुझे ये बांग्लादेशी सफ़ाई करते हुए मिलते हैं। ये अपने को असम का निवासी बताते हैं, परंतु ये सब है अनाधिकृत रूप से रह रहे बांग्लादेशी। पूरे लखनऊ में ये झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रहते हैं। दुखद यह है कि लखनऊ नगर निगम ने इन्हें सफ़ाई कर्मी के रूप में तैनात कर रखा है। गोमतीनगर विस्तार में ख़ाली ज़मीनों और गोमती नदी की तलहटी, नालों के किनारे इनकी बहुत सी झोपड़ियाँ मिल जायेंगी। इनके बारे में न तो लखनऊ पुलिस को चिंता है और न नगर निगम काे। नगर निगम ने तो इन्हें सफ़ाईकर्मी बनाकर अलग से मान्यता दे रखी है। ये अपने को असम के बोंगाई गांव का निवासी बताते हैं और कुछ नलबाड़ी, बरपेटा और नौगांव का।"
भाजपा नेता ब्रजलाल ने लिखा, "असम में यह वही स्थान हैं जहां कांग्रेस सरकारों में इन्हें वोट-बैंक के तौर पर योजनाबद्ध तरीक़े से बसाया गया था। इंदिरा गांधी इन्ही बांग्लादेशियों के सहारे 1983 का असम चुनाव जीतना चाहती थीं, जिनकी संख्या उस समय लगभग 40 लाख थी। आल असम स्टूडेंट यूनियन , आल असम गण संग्राम की मांग थी कि पहले इन विदेशियों को बाहर करो, तब विधानसभा का चुनाव कराओ। इंदिरा अपनी ज़िद पर अड़ी रहीं, जिसके परिणामस्वरूप 12 फ़रवरी 1983 को “नेल्ली” दंगा हुआ, जिसने तीन - चार हजार लोग मारे गये थे।"
उन्हाेंने लिखा, "लखनऊ में रह रहे ये बांग्लादेशी देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए खतरा हैं। जब से बांग्लादेश में कट्टरपंथियों और पाकिस्तान समर्थक सरकार बनी है, यह खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है। बांग्लादेशी अपराधी गैंग डकैती, चोरी जैसी घटनाये कर रहे हैं। इतना ही नहीं बांग्लादेशी आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद- अल- इस्लामी (हूजी) ने देश में कई आतंकी घटनाए की हैं, जिसमें उत्तरप्रदेश भी शामिल है। ख़ूँख़ार हूजी आतंकी बाबू भाई आदि अब भी उत्तरप्रदेश की जेल में हैं। 23 अक्टूबर 2007 को लखनऊ, वाराणसी , अयोध्या की न्यायालयों में हुये बम-ब्लास्ट में हूजी का भी हाथ था। बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात-उल- मुजाहिदीन बांग्लादेश भारत में भी सक्रिय है।"
उन्हाेंने चिंता जताते हुए साेशल मीडिया पर लिखा, "अगर इन अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को भारत से नहीं भगाया तो बांग्लादेशी आतंकी संगठनों को लखनऊ सहित देश में ठिकाना बनाने में मदद मिलेगी। लखनऊ की इन बांग्लादेशियों की झोपड़ियों में बहुत से बच्चे भी मिलेंगे। लखनऊ के चौराहों पर बांग्लादेशी महिलायें-बच्चे गुब्बारे, खिलौने और भीख मांगते मिल जाएंगे।"
भाजपा नेता ने कहा कि उत्तरप्रदेश में केवल योगी आदित्यनाथ ही कड़ा निर्णय लेकर इन्हें वापस बांग्लादेश भेज सकते हैं। पुलिस को भी इनकी जांच में पर्याप्त जानकारी नहीं है। इनके डॉक्यूमेंट लेकर असम में टीम बनाकर भेजना चाहिए, तभी पूरी जानकारी मिल सकेगी। अपने को असम के बताने वाले इन बांग्लादेशियों की दूसरी-तीसरी पीढ़ी का भी पता नहीं चलेगा क्योंकि ये सभी घुसपैठिए है। भारत में बांग्लादेशी, रोहंगिया का घुसपैठ एक अंतरराष्ट्रीय साज़िश का हिस्सा है जो भारत को एक इस्लामिक राष्ट्र( ग़ज़वा-ए-हिन्द) बनाना चाहता है।