अयोध्या : द्वितीय प्रतिष्ठा द्वादशी में ऐ पहुना एहीं मिथिले में रहु न के भजन पर बजी तालियां

-"जन्मे है चारों लालनवा हो दिल झूमत बा" पर झूम उठे श्रोता

अयोध्या : द्वितीय प्रतिष्ठा द्वादशी में ऐ पहुना एहीं मिथिले में रहु न के भजन पर बजी तालियां

अयोध्या, 02 जनवरी । श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा आयोजित द्वितीय प्रतिष्ठा द्वादशी (पाटोत्सव) समारोह के मंच पर पांचवें और अंतिम दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की संध्या की कड़ी में अयोध्या की ही स्थानीय कलाकार से राष्ट्रीय फलक पर लोकगीतों की धूम मचाने वाली संजोली पाण्डेय ने अवधी भाषा में श्रोताओं को प्रणाम निवेदित करते हुए "राम ही राम हो रटन लगी जिभिया.." से उत्कृष्ट प्रस्तुति प्रारम्भ की| युवाओं को लोकगीतों से जोड़ रही संजोली के गाए सोहर, कजरी, बन्ना-बन्नी, बधाई गीत देशभर में मशहूर हैं।

"अवधपुरी में बाजे बधइया घर घर मंगल छाया, बधाई हो बधाई यह शुभ दिन आया" सोहर प्रस्तुत करते हुए कुछ इस तरह की अभिव्यक्ति दी " हो मोरे सखियाँ मोरे रामा मोरे घरे आ जा हम सोहर सुनतीं " बधाई गीत प्रस्तुत करते हुए कहा "जन्मे है चारों लालनवा हो दिल झूमत बा" " राजा जी खजनवा दे द, रानी जी गहनवा दे द, बाजी न मजीरा ऐसे हीरा रातनवा दे द" पर श्रोता झूम उठे| सभी परजा ने अपने अपने अनुसार नेग की मांग की| संजोली ने श्रोताओं को भी अपने साथ गाने पर मजबूर किया| इसके बाद "अइसन मनोहर मंगल मूरत सोहवन सुंदर सूरत हो, ऐ राजा जी एकरे त रहल ह जरूरत महूरत खूब सूरत हो"

संजोली के एक के बाद एक "हमरा जनता बबुआ जीएम होइहे, ऊ त डीएम होइहे न न लालना हिन्द के सितारा बबुआ जोगी जी होइहे, न न मोदी होइहे हो|"

दोबारा बधाई गाते हुए कहा " जुग जुग जियसु ललनवा भवनवा के भाग जागल हो, अंखिया त हवे इनकर मई जइसन नाकिया त बाबूजी के, मुहवा त चाँदवा सुरुजवा " गरी गीत प्रस्तुत करते हुए कहा "अइसन बाराती न देखा अभी तक, जिया करें धकाधक"| अंतिम प्रस्तुति के रूप में विवाह के बाद मिथिलावासियो की रामजी से छेड़ छाड़ का गीत "ऐ पहुना एही मिथिले में रहु न, जवने सुखवा ससुरारी में तवने सुखवा कहुं न" पर सभी को मुग्ध किया| संजोली के साथ आर्गन पर अमीश कुमार, गिटार पर अमन, ढोलक पर संदीप कुमार व पैड पर गौरव ने साथ दिया| कार्यक्रम का संचालन देशदीपक मिश्र ने किया|

"जन्मे हैं राम रघुरैया अवधपुर में बाजे बधइया"

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में सबसे अंत में सुरेश वाड़कर व उनकी पत्नी पद्मा वाड़कर ने अपनी प्रस्तुति से माहौल को भक्तिमय कर दिया| बधाई गीत "जन्मे है राम रघुरैया अवधपुर में बाजे बधइया" से शुरू हुआ कार्यक्रम का विश्राम मानस की चौपाई "मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सो दसरथ अजिर बिहारी" के साथ हुआ|

सुरेश वाड़कर के गीत व अपने राम लला के लिए बधाई "राजा दशरथ गईया लुटावें, कंगना लुटावे तीनों मैया, अवधपुर में बाजे बधइया" सुनकर झूमने लगे श्रोता| इसके बाद कबीर दास की रचना सूफ़ी भजन "राम नाम तू भज ले प्यारे" प्रस्तुत किया| अपने प्रसिद्ध भजन "इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो न|" गीत पर तालियाँ बटोरीं| फ़िल्म राम तेरी गंगा मैली का टाइटिल सांग प्रस्तुत करते हुए सुनाया-

"सुनो तो गंगा ये क्या सुनाए,

कि मेरे तट पर वो लोग आए,

जिन्होंने ऐसे नियम बनाये

कि प्राण जाए पर वचन न जाए,

गंगा हमारी कहे बात ये रोते रोते,

राम तेरी गंगा मैली हो गई,

पापियों के पाप धोते धोते,

हर हर गंगे " गीत पूरा होते ही पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा| इसके बाद वाड़कर ने "मेघा रे- मेघा रे मत परदेस जा रे कि आज तू प्रेम का सन्देस बरसा रे" प्रस्तुत किया| इस दौरान लिए गए आलाप पर तलियाँ गूंज उठीं| श्रोताओं की मांग पर "विट्ठल विट्ठल नाम प्रेम भाव" प्रस्तुत किया| "ओ रे राही तुझे जाना है अयोध्या नगरिया, हाँ तो कहीं रख दे डगर में उतार के पापों की तू गठरिया" गीत पर श्रोताओं ने ताली बजा कर ताल दिया| अंत में मानस की चौपाई "मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सो दसरथ अजिर बिहारी" की तान छेड़ सभी को झूमने पर विवश किया|"

उनकी बेटी अनन्या वाड़कर व जिया वाड़कर ने स्वरों में तथा ऑर्गन पर सत्यजीत प्रभु, बांसुरी पर वरद कटापुरकर, गिटार पर अमोघ दाण्डेकर, पखावज पर कृष्णा मुसड़े व तबला पर विनायक नेटके ने सुंदर संगत दी| कार्यक्रम का संचालन देशदीपक मिश्र ने किया|

कार्यक्रम मंच पर ट्रस्ट महासचिव चम्पतराय, राजेंद्र सिंह पंकज, धनंजय पाठक, डॉ चंद्र गोपाल पाण्डेय, डॉ अनिल मिश्र, गोपाल, नरेन्द्र, कप्तान केके तिवारी, विनोद श्रीवास्तव, भोलेन्द्र, वीरेंद्र आदि मौजूद रहे|