देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज

--कोर्ट ने कहा, सरकारी कार्यालय को अधिकारियों द्वारा आदेश बेचने की खुली दूकान नहीं बनने दे सकते

देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज

प्रयागराज, 29 मई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने देवरिया की निलंबित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकलपीठ ने यह आदेश दिया है। गोरखपुर जिले के गुलरिहा थाने में 22 फरवरी 2026 को मृतक शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की पत्नी गुड़िया सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। कृष्ण मोहन सिंह, देवरिया के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मंदरसन, गौरी बाजार में 2016 से सहायक अध्यापक थे।

आरोप है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव और कार्यालय लिपिक संजीव सिंह ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने के बदले तीनों शिक्षकों कृष्ण मोहन सिंह, ओमकार सिंह और अपर्णा तिवारी से रूपये 16-16 लाख यानी कुल रूपये 48 लाख की रिश्वत मांगी। तीनों शिक्षकों ने यह रकम चुकाई, जिसके लिए उन्हें गहने गिरवी रखने पड़े और कर्ज लेना पड़ा।

20 फरवरी 2026 को कृष्ण मोहन सिंह को भी बीएसए कार्यालय बुलाकर अपमानित और प्रताड़ित किया गया तथा और रकम की मांग की गई। उसी रात 20-21 फरवरी के बीच उन्होंने पंखे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

मृतक की जेब से 4 पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसमें उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और क्लर्क संजीव सिंह को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया और सीबीआई जांच की मांग की। इसके अलावा पुलिस को मृतक के वीडियो और ऑडियो क्लिप भी मिले, जिनमें उन्होंने रिश्वत लिए जाने की बात खुद कही है। सीसीटीवी फुटेज में भी कृष्ण मोहन सिंह का 20 फरवरी को भी बीएसए दफ्तर जाना दर्ज है।

कोर्ट ने कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं और साक्ष्य सुसाइड नोट, गवाह ओमकार सिंह का बयान, वीडियो-ऑडियो क्लिप सभी अभियोजन पक्ष की कहानी की पुष्टि करते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी दफ्तर को आदेश बेचने की दुकान नहीं बनने दिया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मामलों में अग्रिम जमानत केवल असाधारण परिस्थितियों में दी जा सकती है। बीएसए शालिनी श्रीवास्तव पहले से निलम्बित हैं। उन पर बीएनएस की धारा 108, 351(3), 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7/12 के तहत मामला दर्ज है।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया जिसमें कहा कहा है, आरोप बहुत गंभीर है और अधिकारी गैर कानूनी रिश्वत लेने में शामिल हैं। सरकारी कार्यालय को अधिकारियों द्वारा आदेश बेचने की खुली दूकान नहीं बनने दिया जा सकता। शिक्षक को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। जिसके कारण उसने आत्महत्या कर ली।