संभल की रजा मस्जिद वक्फ मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का यथास्थिति का ऐतिहासिक निर्देश: राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करने का आदेश

संभल की रजा मस्जिद वक्फ मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का यथास्थिति का ऐतिहासिक निर्देश: राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल

संभल की रजा मस्जिद वक्फ मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का यथास्थिति का ऐतिहासिक निर्देश: राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करने का आदेश

प्रयागराज, 02 जुलाई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के संभल स्थित प्रसिद्ध रजा मस्जिद वक्फ ए मुस्तफा उस्मानिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई करते हुए वर्तमान स्थिति को बरकरार रखने का निर्देश जारी किया है। यह अंतरिम आदेश मस्जिद से संबंधित किसी भी तरह के बदलाव, निर्माण या ध्वस्तीकरण को अगली सुनवाई तक रोकने का स्पष्ट संकेत है।

यह अहम निर्देश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र और न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने रजा मस्जिद की इंतजामिया कमेटी (प्रबंध समिति) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 जुलाई की तारीख तय की गई है, जिस दिन दोनों पक्षों को अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने होंगे।

इंतजामिया कमेटी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा ध्वस्तीकरण (demolition) को लेकर जारी विस्तृत निर्देशों और दिशा-निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार ने मस्जिद के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया। समिति ने तर्क दिया कि सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसी कार्रवाईयों के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया और पर्याप्त समय देने का निर्देश दिया है, जिसका कथित तौर पर पालन नहीं किया गया।

हालांकि, खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कुछ अस्पष्टताएँ भी नोट कीं। न्यायालय के समक्ष यह स्पष्ट नहीं हो सका कि कथित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ठीक किस तारीख को की गई थी, और न ही यह स्पष्ट हो पाया कि याची (इंतजामिया कमेटी) ने राज्य सरकार द्वारा जारी किसी नोटिस के जवाब में निर्धारित समय-सीमा के भीतर कोई जवाब प्रस्तुत किया था या नहीं। इन बिंदुओं पर स्पष्टता के अभाव में, न्यायालय ने तत्काल किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचने के बजाय, मौजूदा स्थिति को बनाए रखने का निर्देश देना उचित समझा।

न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि मामले के सभी तथ्य उसके समक्ष स्पष्ट रूप से प्रस्तुत हों, विचाराधीन भूमि की वर्तमान स्थिति को बरकरार रखने का आदेश दिया। साथ ही, इसने इंतजामिया कमेटी और राज्य सरकार, दोनों पक्षों से इस संबंध में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इन हलफनामों में ध्वस्तीकरण की तारीख, नोटिस जारी करने, जवाब देने और संपत्ति की वर्तमान स्थिति से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करनी होगी, ताकि न्यायालय मामले की जड़ तक पहुंच सके और न्यायोचित निर्णय दे सके। यह निर्देश शहरी विकास और धार्मिक स्थलों से संबंधित विवादों में कानूनी प्रक्रिया के पालन के महत्व को दर्शाता है।