उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य की डिग्री को लेकर दाखिल याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की, बड़ी राहत
उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य की डिग्री को लेकर दाखिल याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की, बड़ी राहत
प्रयागराज, 07 जुलाई (हिन्दुस्थान समाचार)। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की शैक्षणिक डिग्री को "फर्जी" बताते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल एक महत्वपूर्ण याचिका को खारिज कर दिया गया है। इस फैसले को केशव प्रसाद मौर्य के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
पेट्रोल पंप और झूठे हलफनामे का था आरोप
यह याचिका प्रयागराज के निवासी दिवाकर नाथ त्रिपाठी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पर गंभीर आरोप लगाए थे। याचिकाकर्ता का दावा था कि मौर्य ने कथित रूप से फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर एक पेट्रोल पंप हासिल किया था और इसके अलावा, उन्होंने चुनावी हलफनामे में भी गलत जानकारी प्रदान की थी, जो कि एक गंभीर आपराधिक कृत्य है।
'फर्जी' हिंदी साहित्य सम्मेलन की डिग्री पर था सवाल
याचिका में विशेष रूप से हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयागराज से प्राप्त एक डिग्री पर सवाल उठाया गया था। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि यह डिग्री "फर्जी" और "अमान्य" है, और इसी के आधार पर पेट्रोल पंप प्राप्त किया गया तथा चुनाव में झूठा हलफनामा दाखिल किया गया। याचिका में मांग की गई थी कि चूंकि यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, इसलिए केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ तत्काल प्रभाव से प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कर मामले की गहन विवेचना (जांच) की जानी चाहिए।
सरकार ने आरोपों को बताया 'संज्ञेय नहीं' और 'याची का हलफनामा झूठा'
इस मामले की सुनवाई के दौरान, सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने याचिका का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने अदालत के समक्ष दलील दी कि याचिकाकर्ता (दिवाकर नाथ त्रिपाठी) ने स्वयं अधीनस्थ अदालत में झूठा हलफनामा दाखिल किया है, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। इसके अतिरिक्त, अपर महाधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि याचिका में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध की श्रेणी में नहीं आते हैं, जिसके लिए एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य हो। कानून के अनुसार, संज्ञेय अपराध वे होते हैं जिनमें पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है और जांच शुरू कर सकती है।
न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा था
मामले की गंभीरता को देखते हुए, न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की एकल पीठ ने सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद, गत 23 मई को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। आज, 07 जुलाई को, माननीय न्यायालय ने अपना सुरक्षित फैसला सुनाते हुए याचिका को खारिज कर दिया। इस आदेश के साथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ चल रही आरोपों की जांच और एफआईआर की मांग पर विराम लग गया है, जिससे उन्हें कानूनी मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है।