प्रयागराज: मां कल्याणी ने स्वर्ण ढेड़िया धारण कर दिए दिव्य दर्शन, 150वीं वर्षगांठ पर हुआ भव्य महाशृंगार

ढेड़िया महोत्सव पर स्वर्ण आभूषणों और बेला-गुलाब के फूलों से सजा मां का दरबार, देर रात तक दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु; 25 अक्टूबर तक देख सकेंगे विशेष सजावट।

प्रयागराज: मां कल्याणी ने स्वर्ण ढेड़िया धारण कर दिए दिव्य दर्शन, 150वीं वर्षगांठ पर हुआ भव्य महाशृंगार


प्रयागराज, 24 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के जनपद प्रयागराज में शक्तिपीठ मां कल्याणी देवी मंदिर में ढेड़िया महोत्सव और 150वीं वर्षगांठ का महाशृंगार धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मां कल्याणी देवी का स्वर्ण आभूषणों और बेला-गुलाब के पुष्पों से भव्य शृंगार किया गया। मां ने भक्तों की विपत्तियां दूर करने के प्रतीक स्वरूप अपने हाथों में सोने की ढेड़िया धारण कर दिव्य दर्शन दिए। मां के महाशृंगार के दर्शन के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। मंदिर परिसर मां के जयकारों से गूंज उठा।

महोत्सव के अवसर पर पंडित श्याम जी पाठक ने विधि-विधान से मां का महाभिषेक और षोडशोपचार पूजन कराया। इसके बाद पंडित सुशील पाठक ने ढोल-नगाड़ों, घंटों और घड़ियालों की गूंज के बीच मां की महाआरती की। श्रद्धालुओं ने आरती में शामिल होकर मां का आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में विद्वान ब्राह्मणों ने नवचंडी दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। इसके साथ ही भक्तों ने भजन-कीर्तन कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

150 वर्षों से चली आ रही है ढेड़िया शृंगार की परंपरा

पंडित सुशील पाठक ने बताया कि मां कल्याणी देवी मंदिर में ढेड़िया शृंगार की परंपरा अंग्रेजों के शासनकाल से चली आ रही है। यह परंपरा लगभग 150 वर्षों से निभाई जा रही है। प्रयागराज के विशिष्ट धार्मिक शृंगारों में इस महाशृंगार का विशेष स्थान है।

फूलों और फलों से सजाया गया मंदिर परिसर

मंदिर की आकर्षक सजावट संयोजक दिनेश शर्मा (डीके आर्टीशियन) के नेतृत्व में फूलों, फलों और विभिन्न शृंगार सामग्रियों से की गई। मंदिर परिसर में ढेड़िया पर्व के महत्व को दर्शाती विशेष सजावट भी की गई है। मंदिर के मीडिया प्रभारी राजेश केसरवानी ने बताया कि आंगन में बनाई गई आकर्षक ढेड़िया सजावट 25 अक्टूबर तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रहेगी।

महोत्सव की व्यवस्था में पंडित संतोषानंद महाराज, अनिल पाठक, कृष्ण कुमार पाठक, राजेश केसरवानी, सुधीर शर्मा और महेंद्र तिवारी सहित अन्य लोग जुटे रहे।