AI के दौर में इंसानी अंतर्ज्ञान और नवाचार जरूरी, Triple IT Alumni Meet में उद्योग-अकादमिक सहयोग पर जोर

ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के Global Alumni Meet-2026 का समापन हुआ। अपूर्व कुमार ने AI के व्यावहारिक इस्तेमाल और मानवीय क्षमताओं को अहम बताया, जबकि निदेशक प्रो. मुकुल एस. सुतावाने ने इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम और रिसर्च मजबूत करने पर जोर दिया।

AI के दौर में इंसानी अंतर्ज्ञान और नवाचार जरूरी, Triple IT Alumni Meet में उद्योग-अकादमिक सहयोग पर जोर

प्रयागराज, 14 सितंबर । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव के दौर में तकनीक के व्यावहारिक उपयोग के साथ मानवीय अंतर्ज्ञान का महत्व भी बना रहेगा। एआई को केवल तकनीकी साधन के रूप में देखने के बजाय वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए उसका प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। यह बातें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद (ट्रिपल आईटी) के पूर्व छात्र और डिसीक्यूट एआई के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अपूर्व कुमार ने कहीं। वह सोमवार को संस्थान में आयोजित दो दिवसीय ग्लोबल एलुमनी मीट-2026 के समापन अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि डिसीक्यूट एआई माइक्रोसॉफ्ट और रायनएयर जैसे बड़े ग्राहकों के साथ काम कर रहा है। कंपनी का सर्वम एआई के साथ भी सहयोग है और वह एनवीडिया इनसेप्शन कार्यक्रम के लिए चुनी गई 15 कंपनियों में शामिल है। कंपनी को हाल ही में ग्लोबल टेक अवार्ड भी मिला है। वर्तमान में ट्रिपल आईटी के पांच पूर्व छात्र कंपनी के साथ कार्य कर रहे हैं।

शैक्षणिक पाठ्यक्रम और उद्योग की जरूरतों के बीच अंतर कम करने पर जोर

कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक प्रो. मुकुल एस. सुतावाने ने शैक्षणिक पाठ्यक्रम और उद्योग की जरूरतों के बीच अंतर कम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुसार पाठ्यक्रम में तेजी से बदलाव और संकाय विकास के माध्यम से सुधार किए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थियों को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके। उन्होंने संकाय सदस्यों से कम से कम एक उद्योग विशेषज्ञ से जुड़ने का आग्रह किया, जिससे विचारों, विशेषज्ञता और वास्तविक समस्याओं का आदान-प्रदान हो सके। उन्होंने डिसीक्यूट एआई के साथ संस्थान के सहयोग के लिए आभार जताया और क्वांटम कंप्यूटिंग में अनुसंधान एवं विकास को मजबूत करने की जरूरत बताई।

अनुसंधान और उद्यमिता के लिए मजबूत तंत्र बनाने पर जोर

एलुमनी के डीन प्रो. अनुपम अग्रवाल ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य अनुसंधान, गहन नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की परियोजनाओं की प्रदर्शनी भी लगाई गई। संस्थान में विकसित किए गए पांच संभावनाशील स्टार्टअप ने उद्योग प्रतिनिधियों के सामने अपने नमूने और तकनीकी उत्पाद प्रस्तुत किए।

ट्रिपल आईटी के पूर्व छात्र अंशुमान पात्रो, जिन्होंने जीमैट के बाद फ्रांस में अपना करियर बनाया, ने विभिन्न देशों के उद्यमिता तंत्र की तुलना करते हुए अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि उद्यमिता की प्रवृत्ति केवल विद्यार्थियों की क्षमता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उन्हें मिलने वाली सहायता और मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस अवसर पर अंशुमान पात्रो और ट्रिपल आईटी के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए गए।

डॉ. सौमित्र बालेश्वर गोविल ने निरंतर आत्म-विकास को जरूरी बताया। उन्होंने पेशेवरों को केवल एआई उपकरणों पर निर्भर न रहने और अपनी मूलभूत व्यक्तिगत क्षमताओं एवं कौशल को लगातार विकसित करने की सलाह दी। अरविंद पंवार ने वर्तमान पीढ़ी द्वारा एआई तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने भविष्य के प्रोग्रामरों के लिए आलोचनात्मक चिंतन को महत्वपूर्ण बताया।

पूर्व छात्रों की भागीदारी के चार प्रमुख क्षेत्र बताए

संस्थान के कुलसचिव प्रो. मंदार सुभाष कार्यकर्ते ने संस्थान के विकास में पूर्व छात्रों की भागीदारी के चार प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्र स्टार्टअप को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने और छात्र उद्यमियों के मार्गदर्शक बनने में योगदान दे सकते हैं। इसके अलावा वैश्विक कॉरपोरेट नेटवर्क बढ़ाकर कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व की सहायता और संस्थागत विकास में सहयोग, नई तकनीकों पर केंद्रित अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना तथा इंडस्ट्री प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के लिए निधि और परिसर में इनक्यूबेशन सुविधाओं के विस्तार में आर्थिक सहयोग भी महत्वपूर्ण है।

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष कुमार ने कॉन्क्लेव को विद्यार्थियों को कक्षा आधारित शिक्षा से उद्योग केंद्रित दृष्टिकोण की ओर ले जाने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने पाठ्यक्रम और बाजार की तेजी से बदलती जरूरतों के बीच अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने जनरेटिव एआई, साइबर सुरक्षा, उन्नत रोबोटिक्स, डीप लर्निंग और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों की बढ़ती जरूरत का उल्लेख किया।

एप्लाइड साइंसेज विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सृजित भट्टाचार्य ने विभाग में चल रहे अनुसंधान कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने क्वांटम सूचना एवं प्रौद्योगिकी, जैव सूचना विज्ञान तथा जैव चिकित्सा विश्लेषण एवं इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में संचालित विशेष एमटेक कार्यक्रमों का उल्लेख किया।

प्रबंधन अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र कुमार ने पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण और अधिक मांग वाले प्रबंधन क्षेत्रों में लचीले शैक्षणिक विकल्प उपलब्ध कराने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने एमबीए, पीएचडी और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के साथ शुरू किए गए नए संयुक्त कार्यक्रम का उल्लेख किया।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार सिंह ने राष्ट्र निर्माण में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने रोजगार सृजन को देश की प्रमुख संरचनात्मक चुनौतियों में शामिल बताते हुए टिकाऊ रोजगार के अवसर पैदा करने की आवश्यकता बताई।

विद्यार्थियों के विचारों को स्टार्टअप में बदलने पर जोर

डॉ. रंजना व्यास ने संस्थान में उद्यमिता का वातावरण तैयार करने और भारत सरकार के सहयोग से स्टार्टअप सेंटर की स्थापना की यात्रा की जानकारी दी। उन्होंने ट्रिपल आईटी के 2023 बैच के छात्र द्वारा स्थापित Stimuler का उदाहरण देते हुए बताया कि इस स्टार्टअप को फोर्ब्स की 30 अंडर 30 सूची में स्थान मिला है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में विद्यार्थियों के विचारों को विकसित करने और उन्हें स्टार्टअप के रूप में आगे बढ़ाने के लिए उनकी टीम द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।