एमएलसी प्रत्याशी अशोक राठौर की हार के बाद सोशल मीडिया पर फूटा कार्यकर्ताओं का गुस्सा
एमएलसी चुनाव में अशोक राठौर की हार के बाद भाजपा में असंतोष! सोशल मीडिया पर नेताओं ने उठाए सवाल
झांसी, 28 अक्टूबर । सोशल मीडिया के बेहतर उपयोग का दावा करने वाली भाजपा के झांसी-प्रयागराज स्नातक एमएलसी चुनाव में प्रत्याशी अशोक राठौर की हार के बाद पार्टी के भीतर का असंतोष सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आने लगा है।
युवाओं, बेरोजगारों के साथ ही पार्टी के कुछ वरिष्ठ और पुराने कार्यकर्ताओं ने फेसबुक पर पोस्ट और टिप्पणियों के जरिए संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कई पोस्ट में हार के लिए कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, वरिष्ठ पदाधिकारियों से दूरी, दलबदलुओं को अधिक महत्व देने और जमीन से जुड़े संगठन की अनदेखी को जिम्मेदार बताया गया है।
पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रवींद्र शुक्ल ने फेसबुक पर लिखा कि अगर ऐसा ही रहा तो बहुत बड़ी क्षति होगी, जिसका खामियाजा पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा। उनके इस बयान को पार्टी के मौजूदा हालात पर गंभीर चिंता के रूप में देखा जा रहा है।
संजीत मिश्रा ने टिप्पणी की कि शिक्षित जनता ने भाजपा का बहिष्कार कर एक की राजनीति समाप्त कर दी और गहन चिंतन करने पर विवश कर दिया। वहीं प्रदीप गुप्ता ने चुनाव में हार के कई कारण गिनाते हुए कहा कि पूर्व पदाधिकारियों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की लगातार दूरी, फर्जी फोटो वाले नेताओं का दबदबा, जनप्रतिनिधियों द्वारा निचले स्तर के कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और सामान्य वर्ग की अनदेखी प्रमुख कारण रहे।
अजय शंकर तिवारी ने कार्यकर्ताओं के सम्मान की जरूरत बताते हुए लिखा कि नींव को कमजोर करके कोई भी इमारत ज्यादा दिन खड़ी नहीं रह सकती। उन्होंने पार्टी को ‘रील’ से बचने की सलाह भी दी। चित्रकूट के पत्रकार रतन पटेल ने भी हवा-हवाई राजनीति और फोकसबाजी की जगह जमीन पर मेहनत को जरूरी बताते हुए चुनाव परिणाम को सपाइयों को मिला ईनाम बताया।
नीरज स्वामी ने बदलाव को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि बदलाव हित में हो तो अवश्य बदलना चाहिए, बदला लेने की सोच नहीं बल्कि बदलाव लाने की सोच रखनी चाहिए। अवधेश दुबे ने दलबदलुओं को अधिक तवज्जो और मूल वोटबैंक की उपेक्षा को हार की वजह बताया।
सुनील त्रिपाठी ने सवाल उठाया कि जब लोकप्रिय सांसद ही वोटर लिस्ट से लापता हो गए तो इतने बड़े संगठन के स्नातक और शिक्षक मतदाता कहां चले गए। सुधीर त्रिपाठी ने चुनाव परिणाम को ‘भितरघात का नायाब नमूना’ करार दिया।
पवन गुप्ता तूफान ने भी पुराने और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं तथा समर्पित पदाधिकारियों की अनदेखी पर चिंता जताई। चुनाव परिणाम के बाद सोशल मीडिया पर आई इन टिप्पणियों ने भाजपा के भीतर संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच संवाद को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि इन टिप्पणियों पर पार्टी के आधिकारिक स्तर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।