मारपीट के 44 साल पुराने मामले में 90 वर्षीय बुजुर्ग को राहत, सजा घटाकर भुगती अवधि तक सीमित

मारपीट के 44 साल पुराने मामले में 90 वर्षीय बुजुर्ग को राहत, सजा घटाकर भुगती अवधि तक सीमित

मारपीट के 44 साल पुराने मामले में 90 वर्षीय बुजुर्ग को राहत, सजा घटाकर भुगती अवधि तक सीमित

प्रयागराज, 20 अगस्त। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार को 1980 के एक जमीनी विवाद से जुड़े मारपीट मामले में जेल में बिताई अवधि तक मिली सजा सीमित करते हुए बड़ी राहत दी है।

बिजनौर की चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश ने छह आरोपियों को धारा 147, 323/149 और 307/149 आईपीसी के तहत दोषी करार देते हुए अलग-अलग सजाएं सुनाई थीं, जिनमें अधिकतम सजा एक वर्ष सश्रम कारावास और 200 रुपये जुर्माना थी।

अपील लंबित रहने के दौरान पांच अपीलार्थियों ठाकुरी, केसरी, लेखा, भगवत सिंह और मेघा का निधन हो गया, जिससे उनके विरुद्ध अपील समाप्त हो गई। मामला केवल एकमात्र जीवित अपीलार्थी मंगू के संबंध में सुनवाई योग्य रह गया।

न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकल पीठ ने पाया कि अभियोजन पक्ष के किसी भी गवाह ने मंगू पर किसी विशेष हथियार से हमला करने या किसी विशिष्ट चोट पहुंचाने का आरोप नहीं लगाया था। कोर्ट ने यह भी संज्ञान लिया कि मंगू अब 90 वर्ष से अधिक आयु के हैं और कई उम्र-संबंधी बीमारियों से ग्रस्त हैं, तथा पिछले चार दशकों से मानसिक तनाव झेल रहे हैं।

इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आंशिक रूप से अपील स्वीकार करते हुए धारा 307/149 आईपीसी के तहत दी गई एक वर्ष की सजा को घटाकर पहले से भुगती जा चुकी अवधि तक सीमित कर दिया। यदि अपीलार्थी जमानत पर हैं तो उनकी जमानती को तत्काल मुक्त करने का आदेश भी दिया गया।