फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आरोप में चुनाव की वैधता की चुनौती याचिका खारिज

फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आरोप में चुनाव की वैधता की चुनौती याचिका खारिज

फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आरोप में चुनाव की वैधता की चुनौती याचिका खारिज

प्रयागराज, 06 जुलाई  इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कुशीनगर जिले की रामकोला विधानसभा सीट से जुड़ी एक चुनाव याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका पराजित प्रत्याशी राधा चरण ने दायर की थी, जिसमें विजयी प्रत्याशी विनय प्रकाश गोंड के निर्वाचन को अवैध घोषित करने की मांग की गई थी।

वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में रामकोला सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि विनय प्रकाश गोंड वास्तव में अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं लेकिन उन्होंने 2012 में जारी एक अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के आधार पर फर्जी तरीके से नामांकन दाखिल किया। रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष शिकायत दी गई थी, पर उसे खारिज कर दिया गया था। चुनाव तीन मार्च 2022 को हुआ, जिसमें गोंड विजयी घोषित हुए।

अदालत ने पहले यह तय किया कि क्या निर्वाचन न्यायाधिकरण को किसी जाति प्रमाण पत्र को फर्जी घोषित करने का अधिकार है। याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धाराओं का हवाला देते हुए तर्क दिया कि ट्रिब्यूनल को यह अधिकार प्राप्त है, जबकि प्रतिवादी ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र की वैधता केवल जिला स्तरीय, मंडल स्तरीय और राज्य स्तरीय समिति ही तय कर सकती है।

न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट के कुमारी माधुरी पाटिल मामले और हाल के 'ए. राजा' मामले सहित कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जाति प्रमाण पत्र को केवल संबंधित सांविधिक तंत्र ( स्क्रूटनी कमेटी) के जरिए ही चुनौती दी जा सकती है, न कि चुनाव याचिका में। चूंकि प्रतिवादी का प्रमाण पत्र अब तक किसी भी सक्षम समिति द्वारा रद्द नहीं किया गया था। अदालत ने कहा कि निर्वाचन न्यायाधिकरण को इसकी प्रामाणिकता जांचने का अधिकार

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