पत्नी-बेटी के भरण-पोषण के लिए पति के वेतन से कटेगा 25% हिस्सा, इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश

पत्नी-बेटी के भरण-पोषण के लिए पति के वेतन से कटेगा 25% हिस्सा, इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश

पत्नी-बेटी के भरण-पोषण के लिए पति के वेतन से कटेगा 25% हिस्सा, इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश

प्रयागराज, 26 अक्टूबर। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी और नाबालिग बेटी के भरण-पोषण के मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने पति के सकल वेतन में से आयकर की कटौती को छोड़कर शेष राशि के आधार पर 25 प्रतिशत रकम भरण-पोषण के लिए देने का निर्देश दिया है। यह राशि पति के वेतन से काटकर पत्नी के सत्यापित बैंक खाते में जमा की जाएगी। कोर्ट ने संबंधित पारिवारिक न्यायालय और इंडियन बैंक, उन्नाव के उच्च अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक आदेश पारित करने और कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकल पीठ ने पिंकी वर्मा और अन्य की ओर से दाखिल आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर 22 अक्तूबर 2026 को यह आदेश दिया। याचिका में कानपुर नगर के प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय के 22 दिसंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी। परिवार न्यायालय ने पत्नी और नाबालिग बेटी के भरण-पोषण के लिए 19 हजार रुपये प्रतिमाह देने का आदेश दिया था। याची पत्नी ने इस राशि को बढ़ाकर 40 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की थी।

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि पति इंडियन बैंक में विंडो ऑपरेटर के पद पर कार्यरत है। उसकी आय को देखते हुए भरण-पोषण की राशि पर्याप्त नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि पति के वेतन का 25 प्रतिशत हिस्सा भरण-पोषण के लिए दिया जाना उचित है। यह भी दलील दी गई कि कर्ज की किस्त जैसे स्वैच्छिक वित्तीय दायित्वों के आधार पर पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी कम नहीं की जा सकती।

वहीं, पति की ओर से कहा गया कि पत्नी और नाबालिग बेटी के साथ रहने की संभावना नहीं है और वह अपने वेतन का 25 प्रतिशत हिस्सा भरण-पोषण के लिए देने को तैयार है।

हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी, नाबालिग बच्चों और आर्थिक रूप से असमर्थ माता-पिता का भरण-पोषण करना पति का कानूनी ही नहीं, बल्कि पवित्र दायित्व भी है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भरण-पोषण संबंधी प्रावधान महिलाओं और बच्चों को आर्थिक अभाव से बचाने तथा उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।

कोर्ट ने परिवार न्यायालय के पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए निर्देश दिया कि पति के सकल वेतन में से आयकर की कटौती को छोड़कर शेष राशि का 25 प्रतिशत भरण-पोषण के रूप में काटा जाए। संबंधित परिवार न्यायालय को इंडियन बैंक के अधिकारियों को इस आशय का आदेश जारी करने का भी निर्देश दिया गया है। इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका निस्तारित कर दी।