प्रियाप्रीतम केलिकुंज में मनाया गया वीर हनुमान का पाटाेत्सव
प्रियाप्रीतम केलिकुंज में मनाया गया वीर हनुमान का पाटाेत्सव
अयोध्या, 6 जुलाई (। आषाढ़ शुक्ल दशमी तिथि पर प्रसिद्ध रसिक पीठ श्री प्रियाप्रीतम केलिकुंज साेना देवी मार्ग वासुदेवघाट, अयाेध्याधाम में विराजमान भगवान का प्राकट्याेत्सव धूमधाम से मनाया गया। प्राकट्य उत्सव पर मंदिर प्रांगण में कई धार्मिक कार्यक्रम व अनुृष्ठान संपन्न हुए। शनिवार की सुबह पहले मंदिर के गर्भगृह में विराजमान युगल सरकार समेत वीर हनुमान का विद्वान वैदिक आचार्यों द्वारा वेद मंत्राेंच्चारण संग पंचामृत, फलाें का जूस एवं सुगंधित सर्व औषधियों से अभिषेक किया गया। तदुपरांत उनकाे नवीन वस्त्र धारण कराया। साथ ही साथ दिव्य श्रृंगार किया गया। तदुपरांत पूजन-अर्चन, महाआरती कर वीर हनुमान काे छप्पन भोग लगा। तत्पश्चात साधु-संत व विशिष्टजनाें ने ठाकुर भगवान के प्राकट्याेत्सव का प्रसाद ग्रहण किया।
पाटाेत्सव का कार्यक्रम मंदिर में सुबह से लेकर देररात्रि तक चला। रसिक पीठ प्रियाप्रीतम केलिकुंज के वर्तमान पीठाधीश्वर श्रीमहंत रामगाेविंद शरण महाराज ने आए हुए संत-महंतों का स्वागत-सम्मान कर भेंट-विदाई दी। इस अवसर पर प्रियाप्रीतम केलिकुंज के पीठाधिपति महंत रामगाेविंद शरण महाराज ने बताया कि प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी आषाढ़ शुक्ल दशमी तिथि पर मठ में विराजमान युगल सरकार समेत वीर हनुमान का प्राकट्य महाेत्सव हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। सन-2006 में आषाढ़ शुक्ल दशमी तिथि पर गुरुदेव महंत प्रियाप्रीतम शरण रामायणी महाराज द्वारा मंदिर में वीर हनुमान की प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी। तब से हर वर्ष आश्रम में इसी तिथि पर वीर हनुमान समेत अन्य देवी-देवताओं का पाटाेत्सव मनाया जाता है। उसी अनुसार इस बार भी परंपरागत रूप भगवान का पाटाेत्सव मनाया गया।
प्राकट्य उत्सव के इस कार्यक्रम को पहले गुरुदेव मनाते थे। उनके साकेतवास गमन के बाद अब मैं परंपरानुसार पाटाेत्सव का कार्यक्रम मना रहा हूं। गुरुदेव एक कुशल रामायणी, वक्ता थे। जिनकी गणना विद्वान रामायणियाें में हाेती थी। उन्होंने अयोध्यानगरी के वासुदेवघाट साेना देवी मार्ग एक विशाल आश्रम की स्थापना कर उसका कार्यभार संभाला और सर्वांगीण विकास किया। उनके साकेतवास के बाद अब मैं आश्रम की बागडोर संभाल रहा हूं। जहां सभी उत्सव, समैया, त्याेहार आदि परंपरानुसार मनाया जा रहा है। जिसमें मंदिर से जुड़े शिष्य-अनुयायी, परिकर सम्मिलित होकर पुण्य के भागीदार बनते हैं। मठ अपने उत्तराेत्तर समृद्धि की ओर अग्रसर है। जहां गाै, संत, विद्यार्थी, आगंतुक सेवा सुचार रूप से चल रही है। गुरुदेव के पदचिंहाें पर चलकर मैं आगे बढ़ा रहा हूं। उन्होंने कहा कि यह मंदिर का परंपरागत कार्यक्रम था। जिसमें अयोध्याधाम के संत-महंत समेत मंदिर से जुड़े शिष्य-अनुयायी, परिकर शामिल हुए। उन्होंने भगवान के पाटाेत्सव का प्रसाद ग्रहण कर अपना जीवन सार्थक बनाया।
वीर हनुमान भक्तों के ऊपर अपनी कृपा बनाये रखें। वह मार्ग में आने वाली सभी विपत्ति, भव-बाधाओं काे दूर कर सबका कल्याण करें। भारत समेत पूरे विश्व में सुख-शांति स्थापित हाे। सभी जन आपसी भाईचारा, प्रेम बनाकर रहें। देश में खुशहाली स्थापित हाे। भारत देश सुख, समृद्धि की ओर अग्रसर रहे। पूरी दुनिया में भारत देश का डंका बजे और भारत फिर से विश्व गुरु बने।