तथ्य पर साक्ष्य से ट्रायल कोर्ट ही देगी फैसला : हाईकाेर्ट

तथ्य पर साक्ष्य से ट्रायल कोर्ट ही देगी फैसला : हाईकाेर्ट

तथ्य पर साक्ष्य से ट्रायल कोर्ट ही देगी फैसला : हाईकाेर्ट

प्रयागराज, 04 अप्रैल । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गोरखपुर से जुड़े धोखाधड़ी व अमानत में ख़यानत मामले में हस्तक्षेप से इंकार कर दिया है।

कोर्ट ने कहा पैसा फर्म के खाते में जमा किया गया है। प्रथमदृष्टया केस बनता है। यह साक्ष्य लेकर तथ्य की जांच का मामला, ट्रायल कोर्ट ही तय कर सकती है। और धारा 482 सीआरपीसी के तहत दाखिल याचिका को खारिज कर दिया।

यह आदेश न्यायमूर्ति पद्म नारायण मिश्र ने रामप्यारे चौहान व अन्य की याचिका पर दिया है। आरोप है कि याची अभियुक्तों ने 3,47,00,000 (तीन करोड़ सैंतालीस लाख रुपये) लेने के बावजूद जमीन की रजिस्ट्री नहीं की।

शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने बहस करते हुए न्यायालय को अवगत कराया कि अभियुक्तों ने जमीन देने का झांसा देकर बड़ी धनराशि प्राप्त की, लेकिन बाद में रजिस्ट्री करने से इंकार कर दिया। जो स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी एवं आपराधिक न्यास भंग का मामला बनता है।

कोर्ट ने पाया कि प्रथम दृष्टया अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप स्थापित होते हैं। साथ ही, बैंक खाते के साक्ष्यों से यह भी स्पष्ट हुआ कि उक्त धनराशि का लेन-देन हुआ है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला तथ्यों एवं साक्ष्यों पर आधारित है, जिसका निर्णय ट्रायल कोर्ट द्वारा ही किया जाना उचित है। इसलिए धारा 482 सीआरपीसी के अंतर्गत हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं पाया गया।

इसी के साथ न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए आपराधिक कार्यवाही को जारी रखने का आदेश दिया।