बरेली मंडल में शुरू हुई नई पहल, किसानाें के लिए लाभ का जरिए बनेगी पराली
बरेली मंडल में शुरू हुई नई पहल, किसानाें के लिए लाभ का जरिए बनेगी पराली
बरेली, 9 जुलाई खेतों में धान की कटाई के बाद निकलने वाली पराली अब किसानों के लिए सिरदर्द नहीं, कमाई का जरिया बनेगी। बुधवार को बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) के नवीन कार्यालय में पराली प्रबंधन को लेकर मंडलीय कार्यशाला आयोजित की गई। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई इस कार्यशाला में अधिकारियों, उद्योगपतियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला में पराली को खेतों में जलाने के बजाय उद्योगों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि बरेली मंडल में हर साल लगभग 27 लाख मीट्रिक टन पराली पैदा होती है, जो या तो जलाई जाती है या खेतों में बेकार पड़ी रह जाती है। इससे प्रदूषण तो होता ही है, जमीन की उर्वरता भी प्रभावित होती है।
बिजलीघरों, मिलों और भट्ठों में काम आ सकती है पराली
विशेषज्ञों ने बताया कि पराली से ब्रिकेट और पैलेट बनाकर बिजलीघरों, राइस मिलों, प्लाईवुड फैक्ट्रियों और ईंट-भट्ठों में ईंधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इससे ना केवल लागत घटेगी बल्कि पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।
हरियाणा-पंजाब का मॉडल पेश, 166 मेगावाट तक बन रही बिजली
कार्यशाला में सुखवीर एग्रो (SAEL) कंपनी के सीएल शर्मा ने हरियाणा और पंजाब का उदाहरण रखते हुए बताया कि वहां पराली से 166 मेगावाट तक बिजली बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए बॉयलर में सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत बदलाव की जरूरत होती है और यह कोयले से कहीं ज्यादा असरदार है।
विद्या प्लाईवुड के संचालक अशोक अग्रवाल ने बताया कि उनकी फैक्ट्री में पराली को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे उत्पादन लागत में 10 से 15 फीसदी की बचत हो रही है।
“पराली से ऊर्जा की अपार संभावनाएं” – विशेषज्ञ
सामर्थ मिशन के अधिकारी धर्मेश कुमार और तकनीकी विशेषज्ञ सुनील राय ने बताया कि पराली से तैयार ब्रिकेट और पैलेट की खपत बॉयलर आधारित फैक्ट्रियों, ईंट-भट्ठों और सीबीजी प्लांटों में हो सकती है। इससे न सिर्फ उद्योगों को सस्ता ईंधन मिलेगा बल्कि पराली जलाने से फैलने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी।
यूपी नेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने वर्चुअली कार्यशाला में जुड़ते हुए पराली प्रबंधन को सतत और लाभकारी बनाने के उपाय साझा किए। वहीं संभागीय खाद्य नियंत्रक मनिकंडन ए. ने कहा कि मंडल में ऊर्जा उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन आज की तारीख में एक भी ब्रिकेट या पैलेट बनाने वाली यूनिट नहीं है।
मंडलायुक्त ने किया आह्वान
मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि यह कार्यशाला केवल चर्चा का मंच नहीं, बल्कि समाधान की दिशा में ठोस पहल है। उन्होंने उद्योगों, स्वयं सहायता समूहों और पराली एकत्र करने वालों से अपील की कि वे आगे आएं और इस संसाधन का सदुपयोग करें। उन्होंने कहा,
“पराली अब समस्या नहीं, संसाधन है। इसे जलाने की जगह अपनाने की जरूरत है।”