पीड़िता की विश्वसनीय गवाही सजा के लिए पर्याप्त, अन्य साक्ष्य जरूरी नहीं : हाईकोर्ट

--बलात्कार दोषी की अपील खारिज, उम्रकैद की सजा बरकरार

पीड़िता की विश्वसनीय गवाही सजा के लिए पर्याप्त, अन्य साक्ष्य जरूरी नहीं : हाईकोर्ट

प्रयागराज, 03 जून  इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मुजफ्फरनगर के एक नाबालिग बच्ची से बलात्कार के मामले में दोषी करनपाल उर्फ किरण की अपील खारिज कर दी और निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा तथा न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। मुजफ्फरनगर जिले के थाना नई मंडी क्षेत्र में रात 8-9 जुलाई 14 को आरोपित किरण ने पड़ोसी की लगभग 07 वर्षीय बच्ची को घर से उठाकर गांव के स्कूल के पास ले जाकर बलात्कार किया और वहीं उसकाे बेहोशी की हालत में छोड़कर भाग गया। सुबह पड़ोसी ओमपाल प्रजापति ने बच्ची को स्कूल के पास गंभीर हालत में पाया और घर पहुंचाया।

विशेष सत्र न्यायालय मुजफ्फरनगर ने 24 अगस्त 2018 को आरोपित को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास एवं 25,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

दोषी ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर सजा को चुनौती दी, किंतु हाईकोर्ट ने पीड़िता की गवाही को पूरी तरह विश्वसनीय और ‘स्टर्लिंग विटनेस’ मानते हुए अपील खारिज कर दी।

अदालत ने कहा कि बलात्कार जैसे संगीन मामलों में पीड़िता की एकल गवाही, यदि विश्वसनीय हो, तो दोष सिद्धि का आधार बन सकती है। इसके लिए किसी अन्य साक्ष्य की पुष्टि आवश्यक नहीं है।