एक अलग ही श्रेणी के होते हैं एसिड हमले : हाईकोर्ट

कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से किया इनकार

एक अलग ही श्रेणी के होते हैं एसिड हमले : हाईकोर्ट

प्रयागराज, 11 अप्रैल । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि जिन मामलों में एसिड का इस्तेमाल हमले के हथियार के तौर पर किया जाता है, वे अपराध में इस्तेमाल हथियार की प्रकृति के कारण ’एक अलग ही श्रेणी’ के होते हैं।

गहन जांच की ज़रूरत को देखते हुए जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने रिट याचिका खारिज की। इस याचिका में सम्पत्ति विवाद को लेकर किए गए सुनियोजित एसिड हमले से जुड़ी एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी।

मामले के खास तथ्यों से परे हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस विभाग के प्रति अपनी “गहरी नाराज़गी“ भी ज़ाहिर की। यह नाराज़गी इस बात पर थी कि हाईकोर्ट द्वारा मामलों की सुनवाई शुरू करने से पहले, चोट की रिपोर्ट समय पर आगे नहीं भेजी गईं। एक कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कोर्ट ने कहा कि वह सिर्फ़ चोट की रिपोर्ट समय पर मिल सके, यह सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग ज़िलों से इंस्पेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को बार-बार सम्मन नहीं भेज सकता।

बेंच ने साफ कर दिया कि अगर तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो उसे उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक या उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को सम्मन भेजने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। कोर्ट असल में अरुण शुक्ला द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में प्रयागराज ज़िले के करछना थाना में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी। जिसमें बीएनएस की धारा 352, 351(3) और 124(1) शामिल थीं।

सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने एफआईआर का बारीकी से अध्ययन किया और पाया कि आरोप ’घिनौनी साज़िश’ से जुड़े है, जिसके तहत शिकायतकर्ता पर तेज़ाबी एसिड से हमला करने की योजना बनाई गई।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि यह हमला पूरी तरह से सम्पत्ति विवाद के कारण ही सुनियोजित किया गया। एफआईआर के अनुसार, इस साज़िश में रोहित शर्मा ने मुख्य भूमिका निभाई थी। हालांकि, याचिकाकर्ता (अरुण शुक्ला) और एक अन्य आरोपी को उसके पीछे का सूत्रधार बताया गया। अपराध के हथियार के तौर पर तेज़ाबी एसिड के इस्तेमाल की अत्यधिक गंभीरता को देखते हुए बेंच ने फ़ैसला सुनाया कि इस मामले में गहन जांच की आवश्यकता है। इसलिए बेंच ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर इसे खारिज कर दी।