इलाहाबाद हाईकोर्ट से याची को राहत, CBI कोर्ट में डिस्चार्ज अर्जी दाखिल करने की अनुमति
भ्रष्टाचार मामले में चार्जशीट और समन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका निस्तारित; 30 दिन तक उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक
प्रयागराज, 24 अक्टूबर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार के एक मामले में चार्जशीट और सम्मन आदेश को रद्द करने की याचिका पर याची को सी बी आई कोर्ट में डिस्चार्ज अर्जी दाखिल करने की अनुमति दे दी है और उसके खिलाफ 30 दिन तक कोई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया है। रईस अहमद की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने दिया।
याची रईस अहमद पिछले 25 साल से आशीष जैन के संस्थानों में एकाउंटेंट था। ये संस्थाएं सी जी एच एस से जुड़ी है। निरीक्षण में कमियां पाई गई। अपर निदेशक व कार्यालय अधीक्षक ने कमियां ठीक करने के लिए 50 लाख की घूस मांगी। याची अस्पताल के सहयोगी के साथ पांच लाख पहली किश्त लेकर सी जी एच एस कार्यालय मेरठ पहुंचा। पूरी रकम अगले दिन देने के लिए वापस जाते समय याची बैग सहित सी बी आई द्वारा पकड़ा गया।
याची व अन्य के खिलाफ सी बी आई, ए सी बी गाजियाबाद में भ्रष्टाचार के आरोप में केस चल रहा है। 10 अक्टूबर 2025 को चार्जशीट दाखिल की गई , जिस पर 13 मई 2026 को सम्मन आदेश पारित किया गया ।
इसी चार्जशीट और सम्मन आदेश को रद्द करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी।
कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। याची के वकील ने प्रार्थना की कि याची को संबंधित कोर्ट के समक्ष डिस्चार्ज के लिए समुचित प्रार्थना पत्र दाखिल करने की अनुमति दे दी जाए।
कोर्ट ने कहा याची को आज से 15 दिन के भीतर संबंधित कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर डिस्चार्ज का दावा करते हुए प्रार्थना पत्र दाखिल करने की अनुमति दी जाती है।
कोर्ट वकीलों को सुनने के बाद गुण-दोष के आधार पर, कानून के अनुसार शीघ्रता से उस प्रार्थना पत्र का निस्तारण करेगी और 30 दिन की अवधि तक याची के खिलाफ कोई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर दी।